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सरकारी सैलरी और प्राइवेट नर्सिंग होम का खेल? Supreme Court के इस बड़े फैसले ने उड़ाए डॉक्टरों के होश...

खबर का सार

Supreme Court की दोटूक: सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर नहीं मिलेगी राहत। प्रयागराज मेडिकल कॉलेज जांच में दखल देने से साफ इनकार।

Supreme Court

नई दिल्ली, 23 जून 2026

देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने सरकारी डॉक्टरों द्वारा की जा रही निजी प्रैक्टिस (Private Practice) को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी सेवाओं में रहते हुए प्राइवेट तौर पर मरीज देखना और क्लीनिक चलाना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) के उस आदेश में दखल देने से साफ मना कर दिया, जिसमें प्रयागराज के मोती लाल नेहरू (MLN) मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट तब पहुंचा जब मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के एक एसोसिएट प्रोफेसर ने हाई कोर्ट के जांच के आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी। डॉक्टर के वकील ने दलील दी कि जांच के आदेश से पहले उनके मुवक्किल का पक्ष नहीं सुना गया। इस पर जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, "हाई कोर्ट का उद्देश्य बहुत सही और व्यापक जनहित में है। सरकारी डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करनी चाहिए। यह किसी एक डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई का विषय नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा सार्वजनिक मुद्दा है।" कोर्ट का कड़ा रुख भांपते हुए याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी तुरंत वापस ले ली।

मरीजों को शिफ्ट करने का खेल

प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल और मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की बदहाली को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई चल रही थी। सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि मेडिकल कॉलेज के कई वरिष्ठ प्रोफेसर और डॉक्टर्स शहर में अपनी पत्नियों या करीबियों के नाम पर निजी नर्सिंग होम चला रहे हैं। आरोप है कि ये डॉक्टर सरकारी अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों को बहला-फुसलाकर अपने निजी सेंटरों पर शिफ्ट कर देते हैं, जहां उनसे इलाज और सर्जरी के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। इसी समानांतर स्वास्थ्य प्रणाली (Parallel Medical System) को रोकने के लिए हाई कोर्ट ने कड़े कदम उठाए थे।

हाई कोर्ट के सख्त आदेश

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा था कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों की हालत फंड या सुविधाओं की कमी से नहीं, बल्कि डॉक्टरों की लापरवाही और लालच के कारण खराब हो रही है। डॉक्टर सरकारी बेड पर इलाज करने के बजाय मरीजों को अपने निजी सेट-अप में ले जाकर ऑपरेशन कर रहे हैं, जो सरकार के उद्देश्यों को पूरी तरह विफल करता है। हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को इस पूरे 'कमीशन और प्राइवेट प्रैक्टिस रैकेट' की उच्च स्तरीय जांच कराने का आदेश दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है।

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