नई दिल्ली, 5 अगस्त 2026
WHO Cancer Warning के बाद आम लोगों के बीच Common Drugs को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस चेतावनी का मतलब यह नहीं है कि इन दवाओं का उपयोग करने वाले हर व्यक्ति को Cancer होगा। Doctors ने स्पष्ट किया है कि लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के अपनी दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए। उनके अनुसार, WHO की Cancer Classification संभावित जोखिम का आकलन करती है, लेकिन यह किसी व्यक्ति में बीमारी होने की निश्चित भविष्यवाणी नहीं होती। इसलिए मरीजों को घबराने के बजाय अपने इलाज से जुड़े किसी भी निर्णय के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
क्यों नहीं बंद करनी चाहिए दवा?
विशेषज्ञों का कहना है कि WHO Cancer Warning के बाद सबसे बड़ी गलती दवाओं को अचानक बंद करना हो सकती है। कई Common Drugs गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दी जाती हैं और उन्हें बीच में रोकने से मरीज की स्थिति और खराब हो सकती है। Doctors के अनुसार, किसी दवा से जुड़े संभावित जोखिम और उसके इलाज से मिलने वाले लाभ का आकलन मरीज की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार किया जाता है। ऐसे में बिना Medical Advice दवा छोड़ना कई मामलों में संभावित Cancer Risk से भी अधिक नुकसानदायक हो सकता है।
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WHO की Classification का क्या मतलब है?
विशेषज्ञों ने बताया कि WHO Cancer Warning के तहत किसी दवा या पदार्थ को Carcinogenic या संभावित Cancer Risk वाली श्रेणी में रखने का अर्थ केवल यह है कि उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उसके संभावित जोखिम का मूल्यांकन किया गया है। इसका यह अर्थ नहीं है कि उस दवा का उपयोग करने वाला हर व्यक्ति Cancer से प्रभावित होगा। Doctors का कहना है कि ऐसी Classification का उद्देश्य जोखिमों की पहचान करना और भविष्य में सुरक्षित विकल्पों व बेहतर उपचार रणनीतियों पर काम करना है, न कि लोगों में अनावश्यक डर पैदा करना।
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Doctors ने मरीजों को क्या सलाह दी?
Doctors ने कहा है कि WHO Cancer Warning को लेकर मरीजों को सोशल Media या अपुष्ट जानकारी के आधार पर कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति इन Common Drugs का उपयोग कर रहा है और उसे किसी प्रकार की चिंता है, तो उसे अपने Treating Doctor से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, हर मरीज की बीमारी, दवा की जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए इलाज में बदलाव का निर्णय केवल चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही लिया जाना चाहिए। यही सबसे सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीका माना जाता है।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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