नई दिल्ली, 7 अगस्त 2026
कमर दर्द (Back Pain) को अक्सर लोग सामान्य थकान या गलत बैठने के तरीके का परिणाम मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, हर कमर दर्द सामान्य नहीं होता। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सुबह उठते ही कमर में तेज जकड़न और दर्द महसूस होता है, तो यह Ankylosing Spondylitis का एक शुरुआती संकेत हो सकता है। यह रीढ़ की हड्डी से जुड़ी एक गंभीर और दीर्घकालिक इन्फ्लेमेटरी (Inflammatory) बीमारी है, जो समय के साथ मरीज की गतिशीलता को प्रभावित कर सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानकर सही समय पर इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है।
Ankylosing Spondylitis के मुख्य लक्षण और पहचान
Ankylosing Spondylitis का सबसे प्राथमिक लक्षण निचली कमर (Lower Back) और नितंबों (Glutes) में लगातार दर्द और जकड़न होना है। यह दर्द आमतौर पर सुबह के समय या लंबे समय तक आराम करने के बाद ज्यादा महसूस होता है। जैसे-जैसे व्यक्ति शारीरिक गतिविधि शुरू करता है, दर्द और जकड़न में थोड़ा सुधार देखने को मिलता है। इसके अलावा, मरीजों को लगातार थकान महसूस होना, गर्दन और कंधों में दर्द, और कुछ मामलों में सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। यदि यह लक्षण 3 महीने से अधिक समय तक बने रहें, तो यह इस बीमारी का स्पष्ट संकेत हो सकता है।
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बीमारी के कारण और जेनेटिक रिस्क
यह बीमारी मुख्य रूप से एक ऑटोइम्यून स्थिति (Autoimmune Condition) से जुड़ी होती है, जिसमें शरीर का इम्युनिटी सिस्टम गलती से अपने ही जोड़ों और रीढ़ की हड्डियों पर हमला करने लगता है। इसके पीछे आनुवंशिक (Genetic) कारण सबसे बड़े जिम्मेदार माने जाते हैं। जिन व्यक्तियों में HLA-B27 नाम का जीन मौजूद होता है, उनमें Ankylosing Spondylitis विकसित होने का जोखिम काफी अधिक रहता है। इसके अलावा, खराब जीवनशैली, धूम्रपान (Smoking), और शारीरिक गतिविधि की कमी भी इस बीमारी की स्थिति को अधिक गंभीर और दर्दनाक बना सकती है।
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रोकथाम, उपचार और जीवनशैली में बदलाव
Ankylosing Spondylitis का कोई स्थायी इलाज पूरी तरह से उपलब्ध नहीं है, लेकिन सही समय पर उपचार और थेरेपी के माध्यम से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टरों द्वारा मरीजों को इन्फ्लेमेशन और दर्द कम करने के लिए दवाएं दी जाती हैं। इसके साथ ही नियमित फिजियोथेरेपी (Physiotherapy), स्ट्रेचिंग और हल्का व्यायाम (Exercise) रीढ़ की हड्डी की लचीलापन बनाए रखने में मदद करता है। संतुलित आहार, धूम्रपान से परहेज, और सही पोस्चर (Posture) बनाए रखकर मरीज एक सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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