आजकल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर Polycystic Ovary Syndrome (PCOS) को लेकर तरह-तरह के वीडियो, रील्स और ट्रेंड्स वायरल हो रहे हैं। इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कई अनवेरिफाइड इंफ्लुएंसर्स महिलाओं को खास सप्लीमेंट्स, सीक्रेट डाइट और बिना डॉक्टरी सलाह के ट्रीटमेंट प्रोडक्ट्स लेने का दावा कर रहे हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और गाइनकोलॉजिस्ट्स (Gynecologists) ने इन सोशल मीडिया दावों पर चिंता जाहिर की है। डॉक्टरों का कहना है कि सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली हर जानकारी सही नहीं होती और बिना जांच कराए किसी भी ट्रेंड को फॉलो करना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
सोशल मीडिया पर वायरल ट्रेंड्स और अधूरी जानकारी का खतरा
सोशल मीडिया पर ‘PCOS Diagnosis’ और ‘PCOS Diet Hacks’ जैसे हैशटैग्स को अरबों व्यूज मिल रहे हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर कंटेंट अनवेरिफाइड क्रिएटर्स द्वारा तैयार किया जाता है। कई इंफ्लुएंसर्स सिर्फ अपने ब्रांडेड सप्लीमेंट्स, हर्बल चाय या एक्सट्रीम डाइट चार्ट बेचने के मकसद से भ्रामक दावे करते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि PCOS केवल मुहांसे (Acne) या वजन बढ़ने की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक जटिल एंडोक्राइन और मेटाबॉलिक कंडीशन (Endocrine & Metabolic Condition) है। केवल रील्स देखकर खुद का इलाज या सेल्फ-डायग्नोसिस करने से महिलाएं सही मेडिकल ट्रीटमेंट में देरी कर देती हैं, जिससे आगे चलकर उनकी समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है।
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PCOS से जुड़े आम मिथक और उनकी असली मेडिकल सच्चाई
सोशल मीडिया पर फैले सबसे बड़े मिथकों में से एक यह है कि PCOS से पीड़ित महिलाएं कभी प्रेग्नेंट नहीं हो सकतीं या बर्थ कंट्रोल पिल्स (Birth Control Pills) ही इसका एकमात्र इलाज है। डॉक्टरों के मुताबिक यह पूरी तरह गलत है; सही जीवनशैली, डाइट और सही इलाज से महिलाएं आसानी से कंसीव कर सकती हैं। दूसरा बड़ा मिथक यह है कि कार्बोहाइड्रेट (Carbs) पूरी तरह बंद कर देने से PCOS ठीक हो जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिना सोचे-समझे कठोर डाइट फॉलो करने के बजाय बैलेंस्ड न्यूट्रिशन और रोजाना एक्सरसाइज ज्यादा प्रभावी होती है। हर मरीज की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए एक ही डाइट या सप्लीमेंट सभी महिलाओं पर लागू नहीं हो सकता।
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सही डायग्नोसिस और लाइफस्टाइल में सुधार ही असली समाधान
चिकित्सकों के अनुसार, PCOS के सही डायग्नोसिस के लिए केवल लक्षण देखना काफी नहीं होता, बल्कि अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और हार्मोनल असेसमेंट (Hormonal Assessment) बेहद जरूरी हैं। PCOS के प्रबंधन में लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन (Lifestyle Modification) सबसे अहम भूमिका निभाता है। डॉक्टरों की सलाह है कि वजन में केवल 5 से 10 प्रतिशत की कमी करने से भी इंसुलिन रेसिस्टेंस और पीरियड साइकिल में काफी सुधार आ सकता है। सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स की रील्स पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय महिलाओं को किसी योग्य गाइनकोलॉजिस्ट या एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से मिलकर व्यक्तिगत परामर्श और सही जांच करानी चाहिए।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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