नई दिल्ली, 23 जून 2026
देश में अंगदान आंदोलन को एक नई और ऐतिहासिक दिशा मिली है। भारत ने राष्ट्रीय स्तर पर 5 लाख से अधिक स्वैच्छिक अंगदान प्रतिज्ञाएँ (Organ Donation Pledges) दर्ज करने की एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल कर ली है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत यह सफलता देश के नागरिकों में अंग एवं ऊतक दान (Organ and Tissue Donation) के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता और सामूहिक सामाजिक उत्तरदायित्व को दर्शाती है। सरकार के निरंतर प्रयासों और जनभागीदारी के कारण अब अंगदान को मानवता की सर्वोच्च सेवा के रूप में स्वीकार किया जा रहा है, जिससे अंग प्रत्यारोपण (Transplant) की प्रतीक्षा कर रहे हजारों मरीजों को नया जीवन मिलने की उम्मीद बंधी है।
NOTTO निदेशक ने जताया आभार
इस ऐतिहासिक अवसर पर नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने अंगदान अभियान को देशभर के नागरिकों से मिले व्यापक जनसमर्थन के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने इस मिशन में बहुमूल्य योगदान देने वाले सभी सरकारी व गैर-सरकारी संगठनों, स्वास्थ्यकर्मियों, शैक्षणिक संस्थानों और मीडिया जगत की सराहना की। डॉ. अनिल कुमार ने यह भी रेखांकित किया कि सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के निरंतर और सहयोगात्मक प्रयासों के बिना इस बड़े और महत्वपूर्ण आंकड़े को छू पाना संभव नहीं था।

PM मोदी की 'मन की बात' ने आंदोलन को दी नई गति
हाल के वर्षों में देश के भीतर अंगदान को एक व्यापक राष्ट्रीय जन-आंदोलन बनाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी भूमिका रही है। प्रधानमंत्री ने अपने प्रसिद्ध कार्यक्रम 'मन की बात' के विभिन्न संबोधनों के माध्यम से देशवासियों से इस मानवीय कार्य में सक्रिय रूप से भाग लेने का भावुक आह्वान किया था। पीएम मोदी के इसी प्रेरणादायक संदेश ने समाज के हर वर्ग को अंगदान के जीवन-परिवर्तनकारी महत्व को समझने के लिए प्रेरित किया, जिसके परिणामस्वरूप आज अंग और ऊतकों की मांग तथा उपलब्धता के बीच की खाई को कम करने में बड़ी मदद मिल रही है।

Aadhaar-Based पोर्टल से बेहद आसान हुई पंजीकरण प्रक्रिया
इस पूरे अभियान को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए तकनीकी सुधारों का सहारा लिया गया है। आधार-आधारित अंगदान प्रतिज्ञा पंजीकरण पोर्टल (notto.abdm.gov.in) ने देश के नागरिकों के लिए पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया को अत्यंत सरल, सुरक्षित और Patient-Centric (रोगी-केंद्रित) बना दिया है। इस डिजिटल पोर्टल की मदद से देश के किसी भी कोने से लोग आसानी से अपनी प्रतिज्ञा ऑनलाइन दर्ज कर पा रहे हैं। इसी सुदृढ़ डिजिटल व्यवस्था के कारण चिकित्सा प्रणाली में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित हो रही है, जिससे इस पूरी प्रणाली के प्रति जनता का भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है।

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