हरियाणा, 24 अगस्त 2026
Haryana स्वास्थ्य विभाग के एक Audit में प्रशासनिक पदों पर कार्यरत 16 डॉक्टरों को ₹1,68,98,342 NPA (Non-Practising Allowance) के भुगतान को लेकर सवाल उठाए गए हैं। यह भुगतान जून 2018 से दिसंबर 2025 के बीच किया गया। Audit के अनुसार संबंधित डॉक्टरों द्वारा क्लिनिकल ड्यूटीज किए जाने की पुष्टि करने वाले रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए। मामला सामने आने के बाद संबंधित डॉक्टरों से जवाब मांगा गया है। हालांकि, Haryana Civil Medical Services Association (HCMSA) ने भुगतान का बचाव करते हुए कहा है कि सरकारी सेवा में प्रशासनिक जिम्मेदारियां मिलने से डॉक्टरों पर प्राइवेट प्रैक्टिस संबंधी प्रतिबंध समाप्त नहीं हो जाते।
Audit में ₹1.69 करोड़ का मामला
Audit की आपत्ति के अनुसार कुल राशि में पांच सिविल सर्जनों, सात डिप्टी सिविल सर्जनों और चार मेडिकल अफसरों को किया गया भुगतान शामिल है। Audit ने इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा है कि जून 2018 से दिसंबर 2025 के दौरान इन डॉक्टरों ने प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ क्लिनिकल ड्यूटीज भी निभाई थीं या नहीं। उपलब्ध रिकॉर्ड में क्लिनिकल जिम्मेदारियों से संबंधित आवश्यक दस्तावेज सत्यापन के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए थे। चूंकि कुछ परिस्थितियों में क्लिनिकल जिम्मेदारियां निभाने वाले डॉक्टरों के लिए NPA की पात्रता हो सकती है, इसलिए Audit ने भुगतान की पात्रता को स्पष्ट करने की मांग की है।
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डॉक्टरों से मांगा गया जवाब
मामले में संबंधित डॉक्टरों से जवाब मांगा गया है। रिपोर्ट के अनुसार इसके लिए 21 जुलाई को पत्र जारी किया गया था। यहां विवाद मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि प्रशासनिक पदों पर तैनात डॉक्टरों को NPA दिए जाने की पात्रता किन परिस्थितियों में बनती है और क्या उनके क्लिनिकल काम का रिकॉर्ड उपलब्ध था। Audit ने भुगतान को अंतिम रूप से गलत घोषित नहीं किया है, बल्कि संबंधित अवधि में डॉक्टरों द्वारा निभाई गई क्लिनिकल ड्यूटीज और NPA की पात्रता से जुड़े रिकॉर्ड पर स्पष्टीकरण मांगा है। इसलिए फिलहाल यह मामला Audit की आपत्ति और जवाब की प्रक्रिया के स्तर पर है।
HCMSA ने किया भुगतान का बचाव
Haryana Civil Medical Services Association ने Audit की आपत्ति के बीच NPA भुगतान का बचाव किया है। एसोसिएशन का कहना है कि NPA का उद्देश्य सरकारी डॉक्टरों को प्राइवेट मेडिकल प्रैक्टिस पर लगे प्रतिबंध के लिए क्षतिपूर्ति देना है। HCMSA के अनुसार किसी डॉक्टर को पब्लिक हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन, डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम, टेक्निकल सुपरविजन, सर्विलांस, ट्रेनिंग, मॉनिटरिंग या नेशनल हेल्थ प्रोग्राम के क्रियान्वयन जैसी जिम्मेदारी मिलने से प्राइवेट प्रैक्टिस पर लागू प्रतिबंध खत्म नहीं होता। एसोसिएशन ने यह भी तर्क दिया कि केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों के आधार पर NPA की पात्रता तय नहीं की जानी चाहिए।
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NPA नियमों की व्याख्या पर फोकस
इस पूरे मामले ने सरकारी डॉक्टरों के लिए NPA की पात्रता और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच संबंध को फिर चर्चा में ला दिया है। Audit का मुख्य सवाल यह है कि संबंधित 16 डॉक्टरों ने प्रशासनिक पदों पर रहते हुए क्लिनिकल ड्यूटीज निभाई थीं या नहीं और उसके समर्थन में पर्याप्त रिकॉर्ड क्यों उपलब्ध नहीं कराया गया। दूसरी ओर HCMSA का पक्ष है कि सरकारी डॉक्टरों पर प्राइवेट प्रैक्टिस की पाबंदी बनी रहने के कारण प्रशासनिक भूमिकाएं अपने आप NPA की पात्रता समाप्त नहीं करतीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी इस विवाद पर अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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