Delhi High Court ने MD Geriatric Medicine को DM Super Specialty Courses में प्रवेश के लिए योग्य Feeder Qualification के रूप में शामिल करने के मानदंड पर दोबारा विचार करने का निर्देश National Medical Commission (NMC) को दिया है। यह मामला उन डॉक्टरों की याचिका पर सामने आया, जिन्होंने NEET SS और INI SS के माध्यम से DM Courses में प्रवेश के लिए अपनी Geriatric Medicine डिग्री को पात्रता सूची से बाहर रखे जाने को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि किसी विशेषज्ञता में डॉक्टरों की कमी को उस डिग्रीधारी डॉक्टर को आगे की Super Specialty Education हासिल करने से रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
कोर्ट ने NMC से मांगा पुनर्विचार
Delhi High Court ने मामले की सुनवाई के दौरान उन कारणों को पर्याप्त नहीं माना, जिनके आधार पर MD Geriatric Medicine को DM Super Specialty Courses की Feeder Qualification के रूप में शामिल नहीं किया गया था। कोर्ट के सामने यह भी बताया गया कि पहले Geriatric Medicine को नई और विकासशील विशेषज्ञता माना गया था। 2019 में AIIMS की डीन कमेटी के समक्ष इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी और विभिन्न DM Speciality Departments से टिप्पणियां मांगी गई थीं। कुछ विभागों ने Geriatric Medicine की मौजूदा स्थिति, उपलब्ध मैनपावर और ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर आपत्ति जताई थी।
कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर ध्यान दिया कि AIIMS द्वारा भरोसा किए गए कई दस्तावेज वर्ष 2019 के थे और तब से सात वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। अदालत ने कहा कि पुराने आंकड़ों और परिस्थितियों के आधार पर वर्तमान पात्रता तय करना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर NMC को मौजूदा परिस्थितियों और मानदंडों पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया गया।
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डॉक्टरों की कमी को नहीं माना पात्रता रोकने का आधार
सुनवाई के दौरान NMC की ओर से यह तर्क भी रखा गया कि Geriatric Medicine के लिए फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, टीचिंग स्टाफ, क्लिनिकल मटेरियल और अस्पताल सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। AIIMS की ओर से भी यह कहा गया कि इस विषय को अभी उस स्तर तक विकसित होने में समय लगेगा, जहां वह बड़ी संख्या में मरीजों की जरूरतों को पूरा कर सके। कोर्ट ने इन तर्कों को MD Geriatric Medicine धारकों को DM Courses में अवसर देने से इनकार करने के लिए पर्याप्त नहीं माना।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित अधिकारियों को लगता है कि बुजुर्ग आबादी की जरूरतों के मुकाबले इस क्षेत्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या कम है, तो इसका समाधान Geriatric Medicine में अधिक सीटें और डॉक्टर तैयार करना होना चाहिए। कोर्ट के अनुसार डॉक्टरों की संख्या की कमी को इस डिग्री वाले उम्मीदवारों को DM Super Specialty Courses में आगे बढ़ने से रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
2018 से चल रहा था मामला
इस विवाद की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी। उस समय AIIMS Resident Doctors’ Association के तत्कालीन अध्यक्ष और महासचिव ने Medical Council of India (जिसे अब NMC के नाम से जाना जाता है) को पत्र लिखकर MD (Geriatric Medicine) को DM Specialisations के लिए पात्र ब्रॉड विशेषज्ञताओं की सूची में शामिल न किए जाने का मुद्दा उठाया था। इसके बाद Federation of Resident Doctors’ Association India (FORDA) ने भी मेडिकल रेगुलेटरी बॉडी से इस योग्यता को DM Courses के पात्रता नियमों में शामिल करने का अनुरोध किया था।
वर्ष 2023 में संबंधित डॉक्टरों ने AIIMS से इस विषय पर स्पष्टीकरण मांगा। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें मिला जवाब संतोषजनक नहीं लगा। इसके बाद NMC के समक्ष RTI भी दाखिल की गई, लेकिन अपेक्षित जवाब नहीं मिलने पर डॉक्टरों ने High Court का रुख किया। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने 2019 की कमेटी की कार्यवाही और विभिन्न विभागों की टिप्पणियां भी रखी गईं।
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हर साल करीब 80 सीटें, आगे बढ़ सकते हैं अवसर
याचिकाकर्ताओं में शामिल डॉ. कार्तिक मित्तल ने बताया कि वर्तमान में MD और DNB कार्यक्रमों के माध्यम से Geriatric Medicine में करीब 80 सीटें प्रतिवर्ष उपलब्ध हैं और अलग-अलग संस्थानों द्वारा यह विषय शुरू करने तथा विस्तार करने के साथ सीटों की संख्या बढ़ रही है। उनके अनुसार DM Super Specialty के रास्तों से बाहर रहने के कारण इस क्षेत्र में ट्रेनिंग और शैक्षणिक विकास के आगे के अवसर सीमित थे।
Delhi High Court के निर्देश के बाद अब NMC को इस पात्रता नियम पर फिर से विचार करना होगा। हालांकि, कोर्ट के निर्देश का अर्थ यह नहीं है कि सभी DM Courses में MD Geriatric Medicine की पात्रता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है; अदालत ने NMC को नियमों पर Re-look कर इसे योग्य Feeder Qualification के रूप में शामिल करने के लिए पुनर्विचार करने को कहा है। इस फैसले का आगे का प्रभाव संबंधित रेगुलेटरी और शैक्षणिक अधिकारियों के अगले कदमों पर निर्भर करेगा।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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