नई दिल्ली, 24 अगस्त 2026
केंद्र सरकार देशभर के मेडिकल कॉलेजों और रिसर्च संस्थानों में संक्रामक बीमारियों (Infectious Diseases) से जुड़ी लैब व्यवस्था का विस्तार करने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य शुरुआती जांच (Early Diagnosis), बीमारियों की निगरानी (Disease Surveillance) और आपात स्थिति से निपटने की तैयारी (Outbreak Response) को मजबूत करना है। इसी के तहत स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) ने योग्य मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और रिसर्च संस्थानों से VRDL (Viral Research and Diagnosis Laboratories) स्थापित करने के लिए आवेदन मांगे हैं। वर्तमान में देश में 167 VRDL काम कर रही हैं, जिनमें 11 रीजनल लेवल, 27 स्टेट लेवल और 129 लैब्स मेडिकल कॉलेजों व रिसर्च संस्थानों में स्थित हैं।
167 लैब्स का नेटवर्क पहले से
नई योजना के तहत VRDL नेटवर्क को और बड़ा बनाया जाएगा। ये प्रस्तावित लैब्स संक्रामक कीटाणुओं की रूटीन टेस्टिंग, बीमारियों की निगरानी और महामारी (Outbreaks & Epidemics) के दौरान जांच सुविधाएं देने में मदद करेंगी। इन लैब्स को अपने द्वारा जुटाया गया डेटा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के साथ साझा करना होगा। इस पूरी व्यवस्था का मकसद संक्रामक बीमारियों पर नजर रखना और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत जांच की सुविधा उपलब्ध कराना है।
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हर संस्थान को ₹1.55 करोड़
योजना के तहत चुने गए संस्थान को केंद्र की तरफ से ₹1.55 करोड़ की एकमुश्त सहायता (One-time Financial Assistance) दी जाएगी। इसमें ₹66.8 लाख सिविल वर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव के लिए, जबकि ₹88.2 लाख लैब के उपकरणों (Laboratory Equipment) के लिए तय किए गए हैं। हालांकि, यह सहायता रोजमर्रा के खर्चों के लिए नहीं होगी। कर्मचारियों का वेतन, लैब का सामान और बाकी नियमित खर्च खुद संस्थान को ही उठाने होंगे। यानी VRDL स्थापित करने के लिए शुरुआती इंफ्रास्ट्रक्चर और इक्विपमेंट का खर्च केंद्र देगा, लेकिन बाद के संचालन की जिम्मेदारी संस्थानों की होगी।
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किन संस्थानों को मिलेगा मौका?
इस VRDL प्रोग्राम के लिए राज्य व केंद्र सरकार के मेडिकल कॉलेज, रिसर्च संस्थान, आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल संस्थान, रेलवे अस्पताल और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थान आवेदन कर सकते हैं। प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के लिए भी दरवाजे खुले हैं, लेकिन केवल वही संस्थान योग्य होंगे जो NIRF रैंकिंग में टॉप 50 में शामिल हैं। ये लैब्स आमतौर पर दो से चार जिलों की जरूरतें पूरी करेंगी, जिससे उन इलाकों में भी उन्नत जांच सुविधाएं (Advanced Diagnostic Testing) पहुंच सकेंगी जहां ऐसी व्यवस्थाएं कम हैं।
प्राथमिकता उन इलाकों और जिलों के मेडिकल संस्थानों को दी जाएगी जहां आधुनिक जांच सुविधाओं की कमी है। इसके अलावा मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, जीनोमिक सर्विलांस और ‘वन हेल्थ रिसर्च’ (One Health Research) की क्षमता रखने वाले संस्थानों को भी प्राथमिकता मिलेगी। इस तरह VRDL नेटवर्क को सिर्फ जांच केंद्र बढ़ाने के बजाय बीमारियों की निगरानी और रिसर्च से जोड़ने का प्लान है।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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