नई दिल्ली, 25 अगस्त 2026
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने Medical Devices क्षेत्र में कारोबारी सुगमता बढ़ाने और नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए Medical Devices Rules, 2017 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इन बदलावों के तहत Outsourced Sterilization गतिविधियों के लिए अलग से ऋण लाइसेंस लेने की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है। साथ ही, Clinical Investigation से संबंधित छूट के लिए मान्यता प्राप्त कड़े नियामक क्षेत्राधिकारों की सूची में European Union (EU) को भी शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि इन सुधारों से अनुपालन का बोझ, लागत और प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा तथा उन्नत चिकित्सा तकनीकों तक मरीजों की समय पर पहुंच आसान हो सकेगी।
Sterilization लाइसेंस में राहत
संशोधित नियमों के अनुसार, यदि कोई निर्माता अपने उत्पादों का Sterilization ऐसी दूसरी सुविधा से करवाता है जिसके पास Medical Devices Rules, 2017 के तहत वैध लाइसेंस मौजूद है, तो उसे अब Outsourced Sterilization गतिविधि के लिए अलग से ऋण लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। यह बदलाव व्यापक हितधारक परामर्श के बाद नियम 44 में किया गया है। इसका उद्देश्य उन निर्माताओं के लिए नियामक प्रक्रिया को आसान करना है जिनके पास अपनी Sterilization सुविधा नहीं है। इससे दोहराव वाली प्रक्रिया, प्रशासनिक बोझ, अनुपालन लागत और संबंधित समयसीमा कम होने की उम्मीद है। हालांकि, Outsourced Sterilization के लिए आवश्यक Traceability व्यवस्था को बनाए रखा जाएगा।
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EU को मिली मान्यता
नियम 63 में भी बदलाव किया गया है। इसके तहत ऐसे Medical Devices के लिए Clinical Investigation संबंधी आवश्यकताओं से छूट देने वाले मान्यता प्राप्त कड़े नियामक क्षेत्राधिकारों की सूची में European Union को शामिल किया गया है, जिनके पास EU में पहले से स्वीकृति है। इससे पात्र Devices को भारत में Clinical Investigation की आवश्यकताओं से संबंधित मौजूदा छूट का लाभ मिल सकेगा। इससे Importers और Manufacturers पर नियामक बोझ कम होने की उम्मीद है। इससे पहले इस व्यवस्था में United States, United Kingdom, Australia, Canada और Japan शामिल थे। EU के जुड़ने से भारत का नियामक ढांचा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के साथ और बेहतर तरीके से जुड़ने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
लेबलिंग के लिए छह महीने की अवधि
संशोधित प्रावधानों में नई Labeling आवश्यकता लागू करने के लिए छह महीने की संक्रमण अवधि भी रखी गई है। इसका उद्देश्य निर्माताओं को Labeling, Packaging और संबंधित प्रक्रियाओं में जरूरी बदलाव करने के लिए पर्याप्त समय देना है। सरकार के अनुसार, Medical Devices क्षेत्र में किए गए ये सुधार नियामक निगरानी और कारोबार में आसानी के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास हैं। इससे निर्माताओं को अपनी परिचालन व्यवस्था में अधिक लचीलापन मिल सकता है और विनिर्माण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। सरकार को उम्मीद है कि सरल नियमों से भारतीय Devices उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और देश में उन्नत एवं नवीन चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता में तेजी आएगी।
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गुणवत्ता और सुरक्षा मानक रहेंगे कायम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियामक प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ गुणवत्ता, सुरक्षा और कार्यनिष्पादन से जुड़े मानकों को बनाए रखा जाएगा। संशोधनों का उद्देश्य नियमों को कमजोर करना नहीं, बल्कि अनावश्यक प्रक्रियाओं को हटाकर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और पूर्वानुमान योग्य बनाना है। Outsourced Sterilization के मामले में Traceability व्यवस्था जारी रहने से नियामकीय निगरानी बनी रहेगी। वहीं EU को सूची में शामिल किए जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत पात्र Devices के लिए भारत में बाजार तक पहुंच की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। मंत्रालय के अनुसार, इन सुधारों से Medical Devices नियामक व्यवस्था मजबूत होगी और उद्योग तथा मरीजों, दोनों के लिए समय पर लाभ उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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