नई दिल्ली, 25 अगस्त 2026
National Medical Commission (NMC) के नए ड्राफ्ट में देशभर के डॉक्टरों के लिए NMR Registration को अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से संसद में बताया गया था कि National Medical Register (NMR) के लिए पहचान संख्या हासिल करने का आवेदन स्वैच्छिक था। अब NMC के प्रस्तावित संशोधन में Indian Medical Register या State Medical Register में दर्ज सभी मेडिकल प्रैक्टिशनर्स को NMR पोर्टल के माध्यम से एक बार Unique Identification Number (UID) हासिल करने की बात कही गई है। हालांकि, यह अभी ड्राफ्ट है और अंतिम नियम लागू नहीं हुए हैं।
NMR में UID होगा जरूरी
प्रस्तावित नियमों के अनुसार State Medical Register में पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर के लिए NMC के Ethics and Medical Registration Board (EMRB) की ओर से केंद्रीय स्तर पर एक UID तैयार किया जाएगा। यह संख्या NMR में डॉक्टर की पहचान से जुड़ी होगी और प्रस्ताव के अनुसार इसके आधार पर देशभर में मेडिकल प्रैक्टिस करने की पात्रता मिलेगी। NMR को डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन, प्रैक्टिस लाइसेंस की स्थिति और अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित जानकारी के केंद्रीय रिकॉर्ड के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। राज्य और राष्ट्रीय रजिस्टर के बीच इलेक्ट्रॉनिक Synchronization की भी व्यवस्था प्रस्तावित है, ताकि किसी एक रजिस्टर में बदलाव होने पर दूसरे में भी जानकारी स्वतः अपडेट हो सके।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि पहले से Indian Medical Register या State Medical Register में दर्ज डॉक्टरों को निर्धारित समय के भीतर EMRB के वेब पोर्टल पर अपनी जानकारी अपडेट कर UID हासिल करना होगा। इस एक बार की प्रक्रिया के लिए NMC की ओर से कोई शुल्क नहीं लेने का प्रस्ताव है। यदि ड्राफ्ट इसी रूप में लागू होता है, तो NMR Registration मौजूदा स्वैच्छिक व्यवस्था से बदलकर अनिवार्य प्रक्रिया बन सकता है।
यह भी पढ़ें: Noida Hospital Fire: AC में धमाके के बाद आयुर्वेदिक अस्पताल में लगी आग…
![]()
डॉक्टरों ने इंप्लीमेंटेशन पर उठाए सवाल
प्रस्तावित NMR Registration को लेकर मेडिकल कम्युनिटी की प्रतिक्रिया पूरी तरह एक जैसी नहीं है। हेल्थ एक्टिविस्ट डॉ. केवी बाबू ने इसे पहले के अनुभवों के आधार पर असफल प्रयोग बताया और सवाल उठाया कि जब डॉक्टर पहले से State Medical Councils में पंजीकृत हैं, तो वही जानकारी दोबारा दर्ज कराने की जरूरत क्यों हो। दूसरी ओर FORDA के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अविरल माथुर ने राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत रजिस्टर और UID व्यवस्था को सही दिशा में कदम बताया, लेकिन इसके कार्यान्वयन को लेकर चिंता जताई। उन्होंने पोर्टल के सुचारु संचालन, प्रभावी हेल्पडेस्क और व्यावहारिक समयसीमा की जरूरत बताई।
FORDA के महासचिव डॉ. मीत घोनिया ने कहा कि इतने बड़े पॉलिसी चेंज के लिए स्पष्ट कारण, पारदर्शी संवाद और मेडिकल कम्युनिटी के साथ उचित विचार-विमर्श जरूरी है। Healthcare Reforms Doctors Association (HRDA), तेलंगाना ने भी एकीकृत और विश्वसनीय NMR के उद्देश्य का समर्थन किया, लेकिन पहले इसे स्वैच्छिक बताए जाने के बाद अब मैंडेटरी करने के प्रस्ताव पर नीति में बदलाव की स्पष्ट जानकारी मांगी। संगठन ने यह भी कहा कि डॉक्टरों को पहले से उपलब्ध रजिस्ट्रेशन विवरण बार-बार जमा करने के बजाय State Medical Councils और NMR के बीच बेहतर डिजिटल इंटीग्रेशन होना चाहिए।
![]()
पहले रजिस्ट्रेशन की रफ्तार रही थी धीमी
NMC ने 23 अगस्त को NMR पोर्टल शुरू किया था। इसका उद्देश्य देशभर में पंजीकृत डॉक्टरों का एक केंद्रीय और सत्यापित डेटाबेस तैयार करना था। पोर्टल शुरू होने के बाद कई डॉक्टरों ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं की शिकायत की। Medical Dialogues की रिपोर्ट में RTI के हवाले से बताया गया कि NMR शुरू होने के आठ महीने बाद तक NMC को केवल 10,411 रजिस्ट्रेशन आवेदन प्राप्त हुए थे। मई 2025 तक इनमें से 10,237 आवेदनों को मंजूरी नहीं मिली थी और दो आवेदन खारिज हुए थे।
पिछले वर्ष स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की राज्य मंत्री डॉ. अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में बताया था कि NMR पहचान के लिए आवेदन स्वैच्छिक था। अब प्रस्तावित संशोधन के कारण इसी व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने की संभावना है। FAIMA Doctors Association के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. लक्ष्य कुमार झा ने भी कहा कि एकीकृत डेटाबेस से डॉक्टरों की Credentials वेरिफिकेशन और प्रोफेशनल रेगुलेशन मजबूत हो सकता है, लेकिन पहले से पंजीकृत डॉक्टरों पर अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने ट्रांजिशन पीरियड, भरोसेमंद पोर्टल और डेटा प्राइवेसी की सुरक्षा पर जोर दिया।
यह भी पढ़ें: Medical Devices: नियमों में बड़ा बदलाव, अब लाइसेंस और Approval की राह होगी आसान
दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
Discussion about this post