Qualifying Marks पर कोर्ट का फैसला
याचिकाकर्ताओं ने FMGE में निर्धारित न्यूनतम Qualifying Marks में राहत देने की मांग की थी। उनका तर्क था कि कुछ परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें छूट मिलनी चाहिए। हालांकि, High Court ने कहा कि परीक्षा के Qualifying Criteria वैधानिक नियमों के तहत तय किए गए हैं और अदालत इन्हें बदल या कम नहीं कर सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक समीक्षा का दायरा नियमों को दोबारा लिखने तक नहीं बढ़ाया जा सकता।
NMC नियमों पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि National Medical Commission (NMC) द्वारा निर्धारित नियम सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू होते हैं। यदि किसी परीक्षा के लिए न्यूनतम अर्हता तय की गई है, तो उसे पूरा करना प्रत्येक अभ्यर्थी की जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा कि केवल सहानुभूति के आधार पर वैधानिक प्रावधानों में बदलाव नहीं किया जा सकता और न्यायालय ऐसे नियमों को पुनर्लेखित नहीं कर सकता।
याचिका खारिज, राहत से इनकार
High Court ने अपने आदेश में कहा कि यदि FMGE के Qualifying Marks या अन्य पात्रता शर्तों में किसी प्रकार का बदलाव आवश्यक हो, तो इसका निर्णय संबंधित नियामक प्राधिकरण ही ले सकता है। अदालत ने इस आधार पर याचिका का निपटारा करते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। इस फैसले के साथ यह स्पष्ट हो गया कि FMGE से जुड़े वैधानिक नियमों में बदलाव न्यायिक आदेश से नहीं, बल्कि नियामक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है।रील्स बनाने वाले डॉक्टरों पर गिरेगी गाज? AIIMS Delhi ने जारी किया कड़ा फरमान!
दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB ) सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।

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