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Private Medical College Fees पर Supreme Court सख्त, EWS छात्र की याचिका क्यों हुई खारिज?

खबर का सार

Supreme Court ने EWS छात्र की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें Private Medical Colleges की MBBS फीस को Government Colleges के बराबर करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि निजी और सरकारी संस्थानों की तुलना नहीं की जा सकती।

Supreme Court

नई दिल्ली, 25 जून 2026

Supreme Court ने Private Medical Colleges में MBBS की फीस को Government Medical Colleges के बराबर करने की मांग वाली एक EWS छात्र की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी कॉलेजों की तरह फीस लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई छात्र फीस वहन करने में सक्षम नहीं है, तो वह Scholarship या अन्य सहायता योजनाओं का सहारा ले सकता है।

EWS छात्र ने क्या मांग की थी?

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि EWS श्रेणी के लिए निर्धारित 8 लाख रुपये वार्षिक आय सीमा और Private Medical Colleges की ऊंची फीस के बीच बड़ा अंतर है। उनका कहना था कि लाखों रुपये की वार्षिक फीस आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा को मुश्किल बना देती है। इस आधार पर उन्होंने फीस को अधिक किफायती बनाने और Government Medical Colleges के समान करने की मांग की थी।

Supreme Court ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान Supreme Court की पीठ ने कहा कि Private Medical Colleges और Government Medical Colleges की कार्यप्रणाली अलग होती है। अदालत ने कहा कि निजी संस्थान Self-Financing मॉडल पर चलते हैं, जबकि सरकारी संस्थानों को सरकारी सहायता और अनुदान प्राप्त होता है। ऐसे में दोनों की फीस संरचना को एक समान नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल यह तर्क नहीं दिया जा सकता कि निजी कॉलेजों की फीस अधिक है, इसलिए उसे सरकारी कॉलेजों के बराबर कर दिया जाए।

फीस निर्धारण पर कोर्ट का रुख

अदालत ने माना कि Medical Education के लिए बड़े स्तर पर Infrastructure, Faculty और Equipment की आवश्यकता होती है। इसलिए फीस निर्धारण एक नीतिगत विषय है, जिसका निर्णय संबंधित Regulatory Authorities और राज्य सरकारों के दायरे में आता है। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक हस्तक्षेप तभी उचित होगा जब फीस निर्धारण में स्पष्ट रूप से अवैधता या मनमानी दिखाई दे, जो इस मामले में साबित नहीं हुई।

Scholarship का विकल्प सुझाया

सुनवाई के दौरान Supreme Court ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए Scholarship, Financial Assistance और Subvention Schemes जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। अदालत ने संकेत दिया कि फीस संरचना में हस्तक्षेप करने के बजाय ऐसे सहायता तंत्र का उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए Rajasthan High Court के फैसले को बरकरार रखा।

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दीपक अरोड़ा

पत्रकार | बीजेएमसी | एलएलबी डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव। स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन में सक्रिय।