गाजियाबाद, 04 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के Ghaziabad जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक विशेष पोक्सो (POCSO) अदालत ने पुलिस को एक डॉक्टर के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का सख्त निर्देश दिया है। आरोपी डॉक्टर पर अपने ही बच्चे की देखभाल के लिए रखी गई एक नाबालिग किशोरी (Caregiver) के साथ यौन शोषण और छेड़छाड़ करने का गंभीर आरोप है। यह महत्वपूर्ण आदेश विशेष पोक्सो न्यायाधीश नीरज गौतम ने पीड़ित लड़की के पिता द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत दायर एक आवेदन पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को जारी किया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि स्थानीय वेव सिटी (Wave City) थाना पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कार्रवाई नहीं की जा रही थी।
बंद कमरे में घिनौनी हरकत और धमकी
अदालत में दाखिल किए गए आवेदन के अनुसार, आरोपी डॉक्टर ने उस वक्त इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया जब नाबालिग पीड़िता घर में उसके बच्चे की देखभाल के लिए अकेली थी। पीड़िता के पिता ने शिकायत में बताया कि डॉक्टर अक्सर अकेलेपन का फायदा उठाकर उनकी बेटी के साथ अश्लील हरकतें करता था, उसे गलत तरीके से छूता था और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देता था। डॉक्टर की इस प्रताड़ना से बुरी तरह डरकर नाबालिग लड़की मानसिक रूप से परेशान रहने लगी, जिसके बाद तनाव कम करने के लिए उसके परिजन उसे बिहार स्थित पैतृक गांव ले गए। हालांकि, वहां भी उसकी मानसिक स्थिति में सुधार नहीं हुआ और वह अक्सर रोती रहती थी। इस दौरान डॉक्टर ने उसे वापस बुलाने के लिए कई बार फोन भी किया, लेकिन पीड़िता ने काम पर लौटने से साफ मना कर दिया।
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पुलिस पर लगा मारपीट और दबाव का आरोप
इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब वे 1 मार्च को Ghaziabad लौटे, तो अगले ही दिन डॉक्टर ने उनके घर आकर लड़की को दोबारा काम पर रखने का दबाव बनाया। इंकार करने पर आरोपी डॉक्टर ने नाबालिग के खिलाफ चोरी की झूठी शिकायत दर्ज करवा दी। इसके बाद जब किशोरी को लाल कुआं पुलिस चौकी बुलाया गया, तो कथित तौर पर पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की और बीच-बचाव करने आए उसके भाई को भी थाने में पीटा गया। पीड़िता के पिता ने बताया कि इस घटना के बाद ही उनकी बेटी ने डॉक्टर द्वारा किए गए यौन शोषण का पूरा सच परिवार के सामने रखा। इसके बाद गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर से लेकर एसीपी तक शिकायत की गई, लेकिन पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय पीड़ित परिवार पर डॉक्टर के साथ समझौता (Compromise) करने का दबाव बनाया।
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पोक्सो कोर्ट ने जांच के दिए सख्त आदेश
पुलिस द्वारा कोई कानूनी कार्रवाई न किए जाने और लगातार दबाव बनाए जाने के बाद पीड़ित पिता ने 17 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) लखनऊ और मुख्यमंत्री से भी शिकायत की थी। अंततः कोई न्याय न मिलता देख उन्होंने न्यायालय की शरण ली। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष पोक्सो न्यायाधीश नीरज गौतम ने स्पष्ट कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए डॉक्टर के खिलाफ एक संज्ञेय अपराध (Cognisable Offence) का मामला बनता है और पुलिस द्वारा इसकी गहन जांच कराया जाना पूरी तरह न्यायसंगत है। अदालत ने वेव सिटी थाना प्रभारी (SHO) को आवेदन में दिए गए बयानों के आधार पर संबंधित कानूनी धाराओं के तहत तुरंत मामला दर्ज करने और इस जांच की विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द अदालत में सौंपने का आदेश जारी किया है।
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आर. पी. अरोड़ा
सीनियर जर्नलिस्ट
तीन दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय आर. पी. अरोड़ा राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और समसामयिक विषयों के अनुभवी विश्लेषक हैं। खोजी रिपोर्टिंग और जमीनी मुद्दों पर उनकी पैनी नजर उन्हें एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।
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