नई दिल्ली, 8 जून 2026
State Medical Council के फैसलों के खिलाफ दायर की जाने वाली अपीलों को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। National Medical Commission (NMC) के Ethics and Medical Registration Board (EMRB) ने National Medical Commission Act, 2019 की व्याख्या से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) के पास भेज दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वर्षों से मरीजों और उनके परिजनों द्वारा दायर अपीलों की स्वीकार्यता को लेकर बहस जारी है।
NMC Act पर Health Ministry से राय
EMRB ने अपने हालिया कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) में कहा है कि NMC Act, 2019 केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून है और इसकी व्याख्या से संबंधित प्रश्नों पर उचित निर्णय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा लिया जाना चाहिए। इसी आधार पर बोर्ड ने अपीलों की पात्रता से जुड़े मुद्दे को मंत्रालय के समक्ष भेज दिया है। यह मामला विशेष रूप से इस प्रश्न से जुड़ा है कि क्या State Medical Councils के आदेशों के खिलाफ केवल Registered Medical Practitioners ही अपील कर सकते हैं या मरीजों एवं उनके परिजनों को भी यह अधिकार प्राप्त होना चाहिए।
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लंबे समय से जारी है विवाद
RTI के माध्यम से सामने आई जानकारी के अनुसार, NMC ने सितंबर 2020 से अब तक डॉक्टरों द्वारा दायर कई अपीलों पर सुनवाई की है, जबकि मरीजों और उनके परिजनों द्वारा दायर सैकड़ों अपीलों को स्वीकार नहीं किया गया। EMRB का तर्क रहा है कि NMC Act की धारा 30(3) में चिकित्सा पेशेवरों द्वारा अपील किए जाने का उल्लेख है, जिसके आधार पर बोर्ड ने केवल डॉक्टरों की अपीलों को सुनवाई योग्य माना। हालांकि, इस व्याख्या को कई स्वास्थ्य अधिकार कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों ने चुनौती दी है। उनका कहना है कि कानून में मरीजों की अपीलों पर स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है।
Health Ministry पहले भी दे चुका है निर्देश
इस मुद्दे को लेकर स्वास्थ्य कार्यकर्ता डॉ. के. वी. बाबू ने Health Ministry के समक्ष प्रतिनिधित्व दिया था। इसके बाद मंत्रालय ने जनवरी 2026 में NMC को पत्र भेजकर मामले की जांच करने और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने को कहा था। मंत्रालय ने NMC से इस विषय पर निर्णय लेकर परिणाम से अवगत कराने का भी अनुरोध किया था। इसके बाद NMC ने कहा था कि मामला उसके विचाराधीन है। अब EMRB द्वारा इसे दोबारा मंत्रालय के समक्ष भेजे जाने से स्पष्ट है कि कानूनी व्याख्या को लेकर अंतिम स्थिति अभी भी तय नहीं हो सकी है।
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फैसले का असर मरीजों और डॉक्टरों पर
विशेषज्ञों का मानना है कि Health Ministry द्वारा की जाने वाली व्याख्या भविष्य में चिकित्सा शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। यदि मरीजों को अपील का अधिकार मिलता है तो State Medical Councils के निर्णयों के खिलाफ एक अतिरिक्त नियामक मंच उपलब्ध होगा। वहीं, यदि वर्तमान व्याख्या बरकरार रहती है तो अपील का अधिकार मुख्य रूप से चिकित्सा पेशेवरों तक सीमित रह सकता है। फिलहाल स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
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