नई दिल्ली, 10 जून 2026
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (NCH) ने होम्योपैथी और पंजीकृत होम्योपैथों को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक, मानहानिकारक और निराधार बयानों पर चिंता जताई है। आयोग ने सभी हितधारकों, मीडिया संस्थानों और आम जनता से अपील की है कि वे इस चिकित्सा पद्धति और इससे जुड़े चिकित्सकों के बारे में कोई भी टिप्पणी सोच-समझकर और तथ्यात्मक आधार पर करें। आयोग ने 8 जून 2026 को जारी अपने परिपत्र के माध्यम से जिम्मेदार communication की आवश्यकता पर जोर दिया है। यह सलाह ऐसे समय में आई है जब सोशल और डिजिटल platforms पर चिकित्सा प्रणालियों को लेकर कई तरह की अपुष्ट बातें प्रसारित होती रहती हैं।
जिम्मेदार बयानबाजी पर जोर
NCH के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर जैन ने कहा कि आयोग का दायित्व होम्योपैथी में शिक्षा, practice, पेशेवर आचरण और ethics के मानकों को विनियमित करना और बनाए रखना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि होम्योपैथी और इसके चिकित्सकों को लक्षित करने वाले गैर-जिम्मेदाराना बयानों से बचना चाहिए। आयोग के अनुसार कई मामलों में व्यक्तिगत अनुभव, अप्रमाणित दावे या अधूरी जानकारी के आधार पर सार्वजनिक टिप्पणियां की जाती हैं, जिससे चिकित्सा पेशे की छवि प्रभावित होती है। आयोग ने ऐसे विमर्श में वैज्ञानिक तथ्यों और वैधानिक स्थिति को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई है।
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कानूनी और नियामक स्थिति स्पष्ट
आयोग ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि होम्योपैथी राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम, 2020 के तहत एक कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त चिकित्सा प्रणाली है। साथ ही होम्योपैथिक medicines का regulation औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत किया जाता है। डॉ. जैन ने कहा कि होम्योपैथी के undergraduate और postgraduate courses आयोग द्वारा निर्धारित academic framework के तहत संचालित होते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इन courses में admission प्रक्रिया NEET उत्तीर्ण उम्मीदवारों के माध्यम से होती है, जिससे प्रणाली की औपचारिक और नियामक संरचना स्पष्ट होती है।
मीडिया और public के लिए अपील
NCH ने print, electronic, digital और social media platforms पर सामग्री प्रकाशित या साझा करने वालों से अपील की है कि वे होम्योपैथी या पंजीकृत चिकित्सकों के बारे में बयान देने से पहले पर्याप्त सावधानी बरतें। आयोग का कहना है कि तथ्यात्मक सटीकता और जिम्मेदार communication स्वास्थ्य से जुड़े विमर्श का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए। आयोग ने यह भी जोड़ा कि किसी एक चिकित्सक के आचरण से जुड़ी शिकायतों या चिंताओं को पूरे profession के खिलाफ सामान्यीकृत दावों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ऐसी स्थितियों में संबंधित वैधानिक और disciplinary mechanism के जरिए ही कार्रवाई की जानी चाहिए।
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शिकायतों के लिए तय प्रक्रिया पर जोर
आयोग ने कहा कि यदि किसी individual practitioner के आचरण को लेकर कोई शिकायत, आरोप या चिंता हो, तो उसका समाधान स्थापित statutory, regulatory, disciplinary या judicial mechanisms के माध्यम से किया जाना चाहिए। आयोग के अनुसार सामान्यीकृत आरोप न केवल गलत धारणा बनाते हैं, बल्कि मरीजों और पेशेवरों दोनों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर सकते हैं। डॉ. जैन ने दोहराया कि आयोग होम्योपैथी और पंजीकृत चिकित्सकों की dignity, integrity और legal standing की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि निराधार, भ्रामक या मानहानिकारक बयान फैलाने की स्थिति में आवश्यक होने पर legal action भी लिया जा सकता है।
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