कोलकाता, 25 अगस्त 2026
भारतीय औषध संहिता आयोग (IPC) ने दवाओं की Quality और सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कोलकाता में केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (CDL) और केंद्रीय सौंदर्य प्रसाधन प्रयोगशाला (CCL) के साथ पहली संवादात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य विषय भारतीय फार्माकोपिया के मानकों, दवाओं की गुणवत्ता और Nitrosamine अशुद्धियों की पहचान से जुड़ी चुनौतियां रहा। इसी दौरान IPC ने पहली बार सात भारतीय फार्माकोपिया Nitrosamine अशुद्धि Reference Standards जारी किए। इन मानकों से दवाओं में मौजूद अशुद्धियों का सटीक पता लगाने और उनकी मात्रा निर्धारित करने में मदद मिलेगी।
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दवाओं की Quality पर रहा फोकस
बैठक का विषय “IP 2026: परिप्रेक्ष्य, सुझाव और आगे की राह” रखा गया था। इसमें विशेषज्ञों और संबंधित हितधारकों ने भारत में निर्मित और बाजार में उपलब्ध दवाओं के लिए आधिकारिक Quality Standards के रूप में भारतीय फार्माकोपिया की भूमिका पर चर्चा की। Nitrosamine जैसी अशुद्धियों की निगरानी को दवा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। इन अशुद्धियों का निर्माण दवा के निर्माण, भंडारण या पैकेजिंग के दौरान अनजाने में हो सकता है। कुछ दवाओं में इन अशुद्धियों की मौजूदगी को नियंत्रित करना आवश्यक है, इसलिए नए Reference Standards से परीक्षण और Quality Assurance की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
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7 Nitrosamine Standards पहली बार जारी
IPC की ओर से जारी किए गए सात Reference Standards में एन-नाइट्रोसोडाइमिथाइलएमीन (NDMA), एन-नाइट्रोसोडाइएथाइलएमीन (NDEA), एन-नाइट्रोसोएथाइलआइसोप्रोपाइलएमीन (NEIPA), एन-नाइट्रोसोडाइब्यूटाइलएमीन (NDBA), एन-नाइट्रोसोमिथाइलफेनिलएमीन (NAMPA), एन-नाइट्रोसोडाइआइसोप्रोपाइलएमीन (NDIPA) और एन-नाइट्रोसो-एन-मिथाइल-4-एमिनोब्यूट्रिक एसिड (NAMBA) शामिल हैं। Nitrosamine रासायनिक यौगिक हैं, जो एमीन युक्त पदार्थों की नाइट्राइट के साथ प्रतिक्रिया के दौरान बन सकते हैं। इन्हें जीनविषाक्त और कैंसरकारक यौगिक माना जाता है। नए मानकों से इन अशुद्धियों की पहचान और मात्रा निर्धारित करने की क्षमता बेहतर होगी।
Regulatory Compliance को मिलेगा समर्थन
इन सात Nitrosamine Reference Standards के उपलब्ध होने से दवा परीक्षण, Method Validation, Quality Assurance और Regulatory Compliance को मजबूती मिल सकती है। इनका उपयोग दवाओं में अशुद्धियों की सटीक जांच के लिए किया जा सकेगा। यह पहल उन दवाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जिनका उपयोग उच्च रक्तचाप, पेट संबंधी विकार, मधुमेह और तपेदिक जैसी स्थितियों के उपचार में किया जाता है। इसके अलावा, नए Reference Standards से अंतरराष्ट्रीय Quality Standards के अनुरूप परीक्षण को बढ़ावा देने और महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्रियों के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में भी मदद मिलने की संभावना है।
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विशेषज्ञों ने सहयोग को बताया महत्वपूर्ण
IPC के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन ने उद्घाटन संबोधन में दवाओं की Quality सुनिश्चित करने के लिए CDL प्रयोगशाला के साथ सहयोगात्मक दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (IPGMER), कोलकाता की फार्माकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सुपर्णा चटर्जी और केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला के निदेशक डॉ. राकेश कुमार ऋषि भी उपस्थित रहे। बैठक में नियामक प्राधिकरणों, प्रयोगशालाओं और भारतीय फार्माकोपिया विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श हुआ। इसका उद्देश्य भारतीय फार्माकोपिया और राष्ट्रीय दवा Quality पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करना रहा।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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