नई दिल्ली, 15 मई 2026
देशभर में दवाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) ने बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्यरत स्वायत्त संस्था IPC, गाजियाबाद ने बिहार, महाराष्ट्र और मिजोरम की राज्य फार्मेसी परिषदों के साथ तीन अलग-अलग समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
IPC और राज्य फार्मेसी परिषदों के बीच हुआ समझौता
यह समझौता IPC, गाजियाबाद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया गया। इस अवसर पर IPC के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन, बिहार राज्य फार्मेसी परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश सिन्हा, मिजोरम राज्य फार्मेसी परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. एच. लालहलेनमाविया तथा महाराष्ट्र राज्य फार्मेसी परिषद के अध्यक्ष श्री अतुल अहिरे मौजूद रहे। कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
दवाओं के सुरक्षित और तर्कसंगत उपयोग पर रहेगा फोकस
इन MoU का मुख्य उद्देश्य राज्यों में दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना, Pharmacovigilance गतिविधियों को मजबूत करना और रोगी सुरक्षा से जुड़ी पहलों को आगे बढ़ाना है। इसके तहत पंजीकृत फार्मासिस्टों के बीच National Formulary of India (NFI) के व्यापक उपयोग और प्रचार को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि दवाओं का सुरक्षित, प्रभावी और साक्ष्य-आधारित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
इसके साथ ही राज्यों के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की फार्मेसियों में NFI को एक अनिवार्य संदर्भ दस्तावेज के रूप में स्थापित करने के प्रयास भी किए जाएंगे।
ADR Reporting और निगरानी केंद्रों को मिलेगा बढ़ावा
इस सहयोग के माध्यम से Pharmacovigilance Programme of India (PvPI) को और अधिक मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा। इसके तहत Adverse Drug Reaction (ADR) Reporting तंत्र को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा विभिन्न राज्यों में ADR Monitoring Centres (AMC) की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा।
अधिकारियों के अनुसार इससे दवा सुरक्षा निगरानी प्रणाली अधिक सशक्त होगी और फार्मासिस्टों व स्वास्थ्य पेशेवरों की सक्रिय भागीदारी बढ़ेगी।
फार्मासिस्टों के लिए होंगे Training Program और Workshops
MoU के तहत IPC और राज्य फार्मेसी परिषदें संयुक्त रूप से फार्मासिस्टों के लिए Training Programs, Workshops और Continuous Education Initiatives आयोजित करेंगी। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दवाओं के तर्कसंगत उपयोग, Pharmacovigilance और Pharmacopoeial Standards से जुड़ी पेशेवर दक्षता को बढ़ाना होगा।
इसके अलावा दवा सुरक्षा, नियामक मानकों और Rational Pharmacotherapy के क्षेत्रों में अनुसंधान और पेशेवर सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
जनजागरूकता अभियानों पर भी रहेगा जोर
समझौते के तहत औषधि सुरक्षा, दवा मानकों और रोगी सुरक्षा को लेकर जन और पेशेवर जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने की भी योजना बनाई गई है। IPC तकनीकी और वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराएगा, जबकि राज्य फार्मेसी परिषदें अस्पतालों, स्वास्थ्य संस्थानों और फार्मासिस्टों के साथ समन्वय स्थापित करेंगी।
कई वरिष्ठ विशेषज्ञ भी रहे मौजूद
इस अवसर पर नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वी.के. पॉल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. जी.एन. सिंह और AIIMS कल्याणी के अध्यक्ष प्रो. वाई.के. गुप्ता भी उपस्थित रहे।
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