श्रीनगर, 11 जून 2026
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक डॉक्टर की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने Kashmir University से MD Postgraduate Course में शैक्षणिक उत्कृष्टता के आधार पर Gold Medal प्रदान करने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि कथित कारण वर्ष 2014 में उत्पन्न हुआ था, जबकि याचिका वर्ष 2023 में दायर की गई। कोर्ट ने 9 वर्ष की देरी और याचिकाकर्ता के दावों में लगातार बदलाव को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।
9 साल बाद अदालत पहुंचने पर HC ने उठाए सवाल
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय परिहार और जस्टिस राजनेश ओसवाल की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने समय पर कानूनी उपाय नहीं अपनाया। अदालत ने माना कि इतने लंबे अंतराल के बाद दायर याचिका “delay and laches” के सिद्धांत से प्रभावित है। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल प्रशासनिक निष्क्रियता का हवाला देकर 9 वर्ष की देरी को उचित नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय के अनुसार किसी भी व्यक्ति को अपने अधिकारों के लिए उचित समयसीमा के भीतर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
![]()
Gold Medal विवाद में डॉक्टर और University के दावे अलग
डॉक्टर ने दावा किया था कि वर्ष 2014 के Convocation में उन्हें Gold Medal और Certificate of Merit प्रदान किया गया था, लेकिन बाद में Medal वापस ले लिया गया और नया Medal उपलब्ध होने पर लौटाने का आश्वासन दिया गया। दूसरी ओर Kashmir University ने अदालत में कहा कि संबंधित MD Course के लिए Gold Medal का कोई प्रावधान नहीं था। University ने यह भी स्पष्ट किया कि Convocation का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना था और याचिकाकर्ता को Gold Medal दिए जाने का दावा रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता।
बदलते बयानों ने कमजोर किया मामला
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने मुकदमे के विभिन्न चरणों में अलग-अलग दावे किए। पहले उन्होंने कहा कि उन्हें Gold Medal और Certificate दोनों मिले थे। बाद में उन्होंने Convocation और Medal से जुड़ी घटनाओं का अलग विवरण प्रस्तुत किया। अदालत ने कहा कि इन विरोधाभासी बयानों से प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता स्वयं अपने मामले के तथ्यों को लेकर स्पष्ट नहीं हैं। न्यायालय ने माना कि समय बीतने के साथ उनके दावों में असंगति बढ़ती गई, जिससे मामले की विश्वसनीयता प्रभावित हुई।
![]()
Single Judge के फैसले को बरकरार रखा
इससे पहले Single Judge Bench ने भी सितंबर 2025 में याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने माना था कि डॉक्टर को Certificate of Merit प्रदान किया जा चुका था और Gold Medal का दावा रिकॉर्ड से स्थापित नहीं होता। Division Bench ने भी इसी निष्कर्ष से सहमति जताते हुए अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के बदलते रुख और अत्यधिक देरी को देखते हुए न्यायिक हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। इसके साथ ही अपील को निराधार बताते हुए समाप्त कर दिया गया।
Discussion about this post