नई दिल्ली, 10 जून 2026
भारत में कैंसर उपचार के लिए उपयोग की जाने वाली महत्वपूर्ण Chemotherapy दवाओं Cisplatin और Carboplatin की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। देशभर के कई अस्पतालों और दवा वितरकों ने इन दवाओं की कमी की सूचना दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि Platinum की वैश्विक कीमतों में तेज वृद्धि, आयात आपूर्ति में बाधाएं और सरकार द्वारा निर्धारित Price Cap इस संकट के प्रमुख कारण हैं। इससे हजारों कैंसर मरीजों के उपचार कार्यक्रम प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है।
Chemotherapy की प्रमुख दवाओं की उपलब्धता पर संकट
Cisplatin और Carboplatin भारत में विभिन्न प्रकार के कैंसर जैसे Lung Cancer, Ovarian Cancer, Gall Bladder Cancer, Liver Cancer और अन्य ठोस ट्यूमर के उपचार में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं। Oncologists का अनुमान है कि देश के लगभग एक-चौथाई Chemotherapy मरीजों को Platinum-based दवाएं दी जाती हैं। हाल के सप्ताहों में कई मरीजों को आवश्यक खुराक प्राप्त करने के लिए अलग-अलग शहरों और फार्मेसियों में तलाश करनी पड़ रही है। दवा वितरकों के अनुसार, मांग के मुकाबले आपूर्ति लगातार घट रही है, जिससे अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स पर दबाव बढ़ा है।
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Platinum की कीमतों में उछाल से प्रभावित हुआ उत्पादन
Pharmaceutical कंपनियों का कहना है कि Platinum, जो इन दवाओं का प्रमुख कच्चा माल है, उसकी कीमत पिछले एक वर्ष में लगभग ₹2,000 प्रति ग्राम से बढ़कर करीब ₹5,000 प्रति ग्राम तक पहुंच गई है। इसके अलावा आयात शुल्क में वृद्धि, रुपए की कमजोरी और आयात स्वीकृति प्रक्रिया में लगने वाला समय भी लागत बढ़ा रहा है। कई निर्माता मौजूदा मूल्य सीमा के भीतर उत्पादन को आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं मान रहे हैं। कुछ कंपनियों ने उत्पादन घटा दिया है, जबकि कुछ मामलों में अस्थायी रूप से निर्माण भी रोका गया है।
Price Cap और उद्योग की मांग
दवा निर्माताओं का कहना है कि सरकार द्वारा नियंत्रित अधिकतम कीमतों के कारण वे बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा सकते। इसी कारण कई कंपनियों ने National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) से Cisplatin और Carboplatin के Ceiling Price में लगभग 50 प्रतिशत तक संशोधन की मांग की है। उद्योग प्रतिनिधियों का तर्क है कि यदि कीमतों में संशोधन नहीं किया गया तो उत्पादन और आपूर्ति पर दबाव बना रहेगा, जिससे दवाओं की कमी और गंभीर हो सकती है।
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मरीजों और डॉक्टरों की बढ़ती चिंता
Cancer Specialists का कहना है कि Platinum-based दवाएं कई उपचार योजनाओं की आधारशिला हैं और इनके विकल्प सीमित हैं। कुछ वैकल्पिक दवाएं कम प्रभावी या अधिक Toxic हो सकती हैं। यदि आपूर्ति संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो मरीजों के उपचार में देरी हो सकती है, जिससे उपचार के परिणाम प्रभावित होने का जोखिम बढ़ जाएगा। कई अस्पताल पहले से उपलब्ध स्टॉक के सहारे काम चला रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों ने स्थिति पर जल्द हस्तक्षेप की आवश्यकता जताई है ताकि मरीजों के उपचार में व्यवधान न आए।
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