नई दिल्ली, 2 जुलाई 2026
कनाडा स्थित Global Center for Democratic Governance (GCDG) ने Bangladesh की मानवाधिकार स्थिति को लेकर एक नई रिपोर्ट जारी की है। “Death Without Trial in Bangladesh: September 2024 to June 2026” शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सितंबर 2024 से जून 2026 के बीच देश में हिरासत के दौरान 101 लोगों की मौत हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये घटनाएं जीवन के अधिकार, न्यायिक प्रक्रिया और जवाबदेही से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?
GCDG की रिपोर्ट के अनुसार, 22 महीनों की अवधि में हिरासत के दौरान 101 मौतें दर्ज की गईं। संगठन का कहना है कि यह स्थिति कानून के शासन, न्यायिक निगरानी और विधिसम्मत प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है। रिपोर्ट उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तैयार किए जाने का दावा करती है और इन मामलों में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देती है।
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मानवाधिकार उल्लंघन पर जताई चिंता
रिपोर्ट में मनमानी गिरफ्तारी, निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार से वंचित किए जाने, दंडहीनता तथा स्वतंत्र जांच की कमी जैसी चिंताओं का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा मीडिया की स्वतंत्रता और मानवाधिकार रक्षकों के कार्यों पर कथित प्रतिबंधों को भी रिपोर्ट में प्रमुख मुद्दों के रूप में शामिल किया गया है। GCDG का कहना है कि इन विषयों पर निष्पक्ष संस्थागत कार्रवाई की आवश्यकता है।
स्वतंत्र जांच की उठाई मांग
GCDG ने कहा कि रिपोर्ट का उद्देश्य उपलब्ध तथ्यों का दस्तावेजीकरण करना और अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही तथा संस्थागत सुधार को बढ़ावा देना है। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र के तंत्र, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं, लोकतांत्रिक सरकारों, मीडिया और अन्य संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे रिपोर्ट के निष्कर्षों पर ध्यान दें और Bangladesh में हिरासत के दौरान हुई सभी मौतों की तत्काल, स्वतंत्र, निष्पक्ष और प्रभावी जांच की मांग का समर्थन करें।
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रिपोर्ट को लेकर क्या है स्थिति?
यह रिपोर्ट GCDG द्वारा जारी की गई है और इसमें किए गए दावे संगठन के निष्कर्षों पर आधारित हैं। उपलब्ध जानकारी में Bangladesh सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। ऐसे मामलों में आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
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आर. पी. अरोड़ा
सीनियर जर्नलिस्ट
तीन दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय आर. पी. अरोड़ा राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और समसामयिक विषयों के अनुभवी विश्लेषक हैं। खोजी रिपोर्टिंग और जमीनी मुद्दों पर उनकी पैनी नजर उन्हें एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।
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