नई दिल्ली, 01 जुलाई 2026
भारत के Pharmacy और मेडिकल एजुकेशन सेक्टर में आमूलचूल बदलाव लाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग (National Pharmacy Commission - NPC) की स्थापना के लिए तैयार किए गए 'राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग विधेयक, 2026' के संशोधित मसौदे को सार्वजनिक कर दिया है। सरकार ने इस नए और प्रस्तावित कानून को अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आम जनता और सभी संबंधित हितधारकों (Stakeholders) से उनके बहुमूल्य सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं। इस नए विधेयक के पारित होने के बाद देश में दशकों पुराने फार्मेसी अधिनियम, 1948 को पूरी तरह निरस्त (Repeal) कर दिया जाएगा, जिससे पूरे फार्मेसी रेगुलेशन का ढांचा बदल जाएगा।
पुराना फार्मेसी एक्ट होगा खत्म
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सरकार देश में Pharmacy शिक्षा और पेशे के स्तर को वैश्विक मानकों के अनुरूप सुधारना चाहती है। इसी उद्देश्य से प्रस्तावित राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग (NPC) विधेयक, 2026 के पुराने मसौदे को पहले सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया के लिए रखा गया था। उस दौरान देश भर से प्राप्त विभिन्न टिप्पणियों, फीडबैक और महत्वपूर्ण सुझावों की गहन जांच करने के बाद मंत्रालय ने अब इसका एक नया 'संशोधित मसौदा' तैयार किया है। इस नए कानून के लागू होते ही आजादी के समय का फार्मेसी अधिनियम, 1948 इतिहास का हिस्सा बन जाएगा और उसकी जगह एक आधुनिक रेगुलेटरी बॉडी यानी राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग ले लेगा।

आधिकारिक वेबसाइट पर ड्राफ्ट लाइव
संशोधित राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग विधेयक, 2026 के इस नए मसौदे को 01 जुलाई, 2026 को एक सार्वजनिक सूचना के माध्यम से आधिकारिक तौर पर जारी किया गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसे अपनी आधिकारिक वेबसाइट के 'समाचार एवं मुख्य समाचार' (News & Highlights) अनुभाग के अंतर्गत आम लोगों के पढ़ने के लिए अपलोड कर दिया है। इस कदम के पीछे सरकार की मंशा यह सुनिश्चित करना है कि देश के इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य नीतिगत बदलाव में डॉक्टरों, फार्मासिस्टों, चिकित्सा संस्थानों, छात्रों और आम नागरिकों, सभी की समान सहभागिता और समावेशन हो सके।

सुझाव भेजने की अंतिम तिथि
मंत्रालय ने इस प्रस्तावित कानून को और अधिक समृद्ध, व्यावहारिक और त्रुटिहीन बनाने के लिए सुझाव भेजने की एक निश्चित समय-सीमा तय की है। हितधारक और आम जनता इस विधेयक पर अपनी प्रतिक्रियाएं, आपत्तियां या सुझाव ई-मेल आईडी so.ahssecn-mohfw[at]gov[dot]in पर डिजिटल माध्यम से भेज सकते हैं। इसके अतिरिक्त, लिखित सुझाव डाक द्वारा "अवर सचिव (एएचएस), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कर्तव्य भवन-1, प्रथम मंजिल, ए विंग" के पते पर भी भेजे जा सकते हैं। सभी आवेदकों को अपने पत्र या ई-मेल के विषय (Subject) में "राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग विधेयक, 2026 पर सुझाव/टिप्पणियां" लिखना अनिवार्य होगा, और ये सभी सुझाव 31 जुलाई, 2026 तक ही स्वीकार किए जाएंगे।
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सीनियर जर्नलिस्ट तीन दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय आर. पी. अरोड़ा राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और समसामयिक विषयों के अनुभवी विश्लेषक हैं। खोजी रिपोर्टिंग और जमीनी मुद्दों पर उनकी पैनी नजर उन्हें एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।आर. पी. अरोड़ा

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