CSF Rhinorrhea के इलाज के बाद बिगड़ी हालत
मामले के अनुसार, Kiran Bala को सितंबर 2011 में नाक से असामान्य रूप से Fluid Leak होने की समस्या हुई थी। जांच के बाद उन्हें CSF Rhinorrhea का पता चला और 20 सितंबर 2011 को Ludhiana के Satguru Pratap Singh Apollo Hospitals में भर्ती कराया गया। शुरुआती Endoscopic Surgery के बाद CSF Leak कुछ समय के लिए ठीक हुआ, लेकिन अगले दिन दोबारा Leak होने लगा। इसके बाद Doctors ने Fluid को Drain करने और Repair को ठीक होने में मदद देने के लिए Lumbar Drain लगाने की सलाह दी। 23 सितंबर को Lumbar Drain लगाया गया। इसके बाद महिला ने दोनों पैरों में दर्द और असहजता की शिकायत की। रात के दौरान स्थिति लगातार बिगड़ती गई और 24 सितंबर की सुबह करीब 4 बजे तक उनके निचले अंगों में Sensation और Movement खत्म हो गया, जिसके बाद गंभीर Paralysis की स्थिति सामने आई।यह भी पढ़ें: NEET 2026: Category से जुड़ी गलती पर HC का बड़ा फैसला, MBBS Aspirant को मिली राहत
19 घंटे बाद हुआ MRI, सामने आया Myelitis
NCDRC के सामने मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह था कि Lumbar Drain लगाने के बाद महिला की लगातार बढ़ती शिकायतों पर Hospital की Medical Team ने कितनी तेजी से कार्रवाई की। रिकॉर्ड के अनुसार 23 सितंबर की शाम करीब 5:30 बजे से महिला ने पैरों में दर्द और सुन्नपन की शिकायत करनी शुरू कर दी थी। इसके बावजूद MRI अगले दिन करीब 1 बजे किया गया। MRI में Spinal Cord में बदलाव और सूजन के संकेत मिले, जिन्हें Myelitis से जोड़ा गया। Commission ने माना कि Hospital Team को मरीज के बढ़ते दर्द, Sensation कम होने और Motor Power में गिरावट को गंभीरता से लेते हुए तत्काल Clinical Examination, MRI और Specialist Opinion की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए था। इस देरी के दौरान महिला की स्थिति गंभीर Paralysis में बदल गई।Surgical Error नहीं, लेकिन Response में कमी
NCDRC ने स्पष्ट किया कि उसे Lumbar Drain लगाने की प्रक्रिया में कोई प्रत्यक्ष Surgical Error या ऐसी Expert Evidence नहीं मिली, जिससे यह साबित हो कि Drain गलत तरीके से लगाया गया था। Commission के अनुसार असली समस्या Procedure के दौरान नहीं, बल्कि उसके बाद मरीज के गंभीर लक्षण सामने आने पर Medical Team की Response में थी। Commission ने कहा कि Hospital और संबंधित Doctors को Lumbar Drain से जुड़ी संभावित गंभीर Complications को ध्यान में रखते हुए Resident Doctors और Nursing Staff को पहले से सतर्क और तैयार रखना चाहिए था। Medical Records में भी रात के दौरान उठाए गए कदमों और MRI में हुई देरी का पर्याप्त स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला। इसी collective lack of urgency को Commission ने Service Deficiency माना।
Hospital पर 90%, Doctors पर 5-5% जिम्मेदारी
NCDRC ने मामले में Hospital पर कुल Compensation की 90 प्रतिशत जिम्मेदारी तय की, जबकि संबंधित दो Doctors पर 5-5 प्रतिशत की जिम्मेदारी डाली गई। Commission ने परिवार की ओर से मांगे गए ₹2 करोड़ के Compensation को स्वीकार नहीं किया और मरीज की उम्र, शारीरिक एवं मानसिक परेशानी, परिवार पर पड़े प्रभाव तथा आगे हुए इलाज के खर्च और मामले में पाई गई Service Deficiency को देखते हुए ₹15 लाख का Lump Sum Compensation तय किया। इस राशि पर शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा Hospital को ₹25,000 Litigation Cost देने का निर्देश दिया गया है। मामले में यह महत्वपूर्ण है कि Commission ने Paralysis को केवल Procedure की गलती से नहीं जोड़ा, बल्कि गंभीर Post-Procedural Symptoms पर समय पर Medical Response की कमी को Liability का आधार माना।यह भी पढ़ें: AIIMS News: INI-CET July 2026 Open Round में 44 Candidates की Candidature रद्द
दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB ) सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।

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