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Home खबरें

Bihar के Hospital से छुट्टी मिल चुकी थी, फिर भी क्यों रुकी रही प्रसूता और नवजात?

Medical Reporter by Medical Reporter
May 30, 2026
in खबरें, राष्ट्रीय ख़बरें
Bihar
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बिहार, 30 मई

Bihar के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित रक्सौल के डंकन चैरिटेबल अस्पताल पर एक गरीब कुष्ठ पीड़ित परिवार की प्रसूता और नवजात बच्ची को इलाज का बिल जमा न करने पर घंटों तक रोके रखने का आरोप लगा है। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद देर रात परिवार को बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

प्रसव के लिए कराया गया था भर्ती

पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने बताया कि रामगढ़वा कुष्ठ आश्रम निवासी गणेश पासवान की पुत्री ललिता कुमारी को प्रसव पीड़ा होने पर 22 मई को रक्सौल स्थित डंकन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गणेश पासवान स्वयं 40 प्रतिशत शारीरिक अक्षमता से ग्रस्त हैं। अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के माध्यम से प्रसव कराया गया, जिसके बाद ललिता ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।

60 हजार रुपये से अधिक का बिल 

परिवार का आरोप है कि डॉक्टरों द्वारा छुट्टी दिए जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने प्रसूता के इलाज के लिए लगभग 45 हजार रुपये और नवजात बच्ची के उपचार के लिए 15,850 रुपये का बिल सौंप दिया। इस तरह कुल देय राशि 60 हजार रुपये से अधिक हो गई।

परिजनों का कहना है कि आर्थिक रूप से बेहद कमजोर होने के कारण वे इतनी बड़ी राशि का भुगतान नहीं कर सके। परिवार पहले ही अपनी जमा-पूंजी से 3,500 रुपये अस्पताल में जमा करा चुका था।

रात तक अस्पताल में रोके रखने का आरोप

पीड़ित परिवार का आरोप है कि भुगतान न होने के कारण अस्पताल प्रशासन ने सुबह चिकित्सा रूप से छुट्टी मिलने के बावजूद प्रसूता और नवजात बच्ची को रात करीब नौ बजे तक अस्पताल परिसर में रोके रखा। इस दौरान परिवार लगातार मदद की गुहार लगाता रहा।

प्रेस क्लब और जिला प्रशासन ने किया हस्तक्षेप

मामले की जानकारी मिलने पर पीड़ित परिवार ने एक वरिष्ठ अधिकारी से संपर्क कर सहायता मांगी। इसके बाद मोतिहारी प्रेस क्लब को मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया।

प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने सुंदरपुर स्थित कुष्ठ आश्रम के संचालक कृष्णा यादव के माध्यम से अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया और परिवार की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए उन्हें छोड़ने का अनुरोध किया। हालांकि आरोप है कि अस्पताल प्रशासन तत्काल इसके लिए तैयार नहीं हुआ।

बाद में प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल, उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार और रक्सौल के अनुमंडलाधिकारी को मामले से अवगत कराया। प्रशासन के हस्तक्षेप और सख्त रुख के बाद अस्पताल प्रबंधन ने देर रात प्रसूता और नवजात को बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के अस्पताल से जाने की अनुमति दे दी।

अस्पताल ने आरोपों को बताया गलत

वहीं, डंकन चैरिटेबल अस्पताल के निदेशक डॉ. प्रभु ने प्रसूता और नवजात को बंधक बनाए जाने के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप उचित नहीं हैं।

डॉ. प्रभु के अनुसार, बाद में मानवीय आधार पर परिवार के सभी शुल्क माफ कर दिए गए और उन्हें सम्मानपूर्वक अस्पताल से विदा किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान गरीबों की सहायता करता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में संस्थान की भी अपनी सीमाएं होती हैं।

बेहद कमजोर आर्थिक स्थिति में है परिवार

जानकारी के अनुसार, प्रसूता ललिता कुमारी का परिवार अत्यंत गरीब है। उसके पिता कुष्ठ रोग से पीड़ित हैं, जबकि पति कबाड़ एकत्र कर परिवार का पालन-पोषण करता है। ऐसे में इलाज का भारी-भरकम बिल परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गया था।

सवालों के घेरे में स्वास्थ्य सेवाओं का मानवीय पक्ष

यह मामला एक बार फिर स्वास्थ्य संस्थानों में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के साथ व्यवहार और मानवीय दृष्टिकोण को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने आरोपों से इनकार किया है, लेकिन जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद परिवार को राहत मिलना इस मामले को चर्चा का विषय बना रहा है।

यह भी पढ़े: गुजरात में Ebola की दस्तक की आशंका! जांच रिपोर्ट आते ही सामने आई बड़ी सच्चाई

Tags: Bihar Hospital NewsBihar NewsCaesarean DeliveryDistrict AdministrationDuncan Charitable HospitalEast ChamparanGanesh PaswanHospital Bill DisputeLalita KumariLeprosy Patient FamilyMotihari NewsMotihari Press ClubNewborn BabyRaxaulRaxaul NewsSaurabh Jorwal
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