नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026
दिल्ली के GTB Hospital की नई Emergency Facility में एक गंभीर रूप से घायल Patient की मौत के बाद उसके परिजनों और अस्पताल Staff के बीच विवाद बढ़ गया। आरोप है कि Patient की हालत बिगड़ने और मौत के बाद उसके Attendants ने Emergency परिसर में तोड़फोड़ की, Doctors और Staff को धमकाया तथा उन पर हमला करने की कोशिश की। घटना में कथित तौर पर खिड़कियों के शीशे तोड़े गए और टूटे हुए कांच, चाकू तथा पिस्टल का इस्तेमाल कर Staff को डराने-धमकाने की कोशिश की गई। Hospital प्रशासन ने मामले में Police से FIR दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
Patient की मौत के बाद विवाद
जानकारी के अनुसार, Patient की पहचान पवन के रूप में हुई है। उसे सड़क दुर्घटना के बाद 19 अगस्त 2026 को Lal Bahadur Shastri Hospital से GTB Hospital की Emergency Facility में रेफर किया गया था। Patient को Internal Brain Injury थी और उसकी हालत गंभीर बताई गई। Hospital के अनुसार, Emergency में इलाज और Resuscitation के दौरान उसकी स्थिति और बिगड़ गई, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। मौत के बाद Patient के Attendants कथित तौर पर आक्रोशित हो गए और उन्होंने Emergency परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान Doctors और अन्य Healthcare Staff के साथ कथित तौर पर अभद्रता और हमला करने की कोशिश की गई।
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तोड़फोड़ और हमले का आरोप
Hospital की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, Attendants ने परिसर में लगे खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए और Doctors तथा Staff को धमकाया। आरोप है कि कुछ लोगों ने टूटे हुए कांच, चाकू और पिस्टल का इस्तेमाल करते हुए Healthcare Workers पर हमला करने की कोशिश की। घटना के समय Police Personnel भी Facility में मौजूद थे। इस दौरान एक Attendant कथित तौर पर टूटे हुए शीशे से घायल हो गया। खास बात यह रही कि हमले की स्थिति के बावजूद Hospital Staff ने घायल Attendant को इलाज उपलब्ध कराया और उसे Surgery Emergency Ward में Medical Treatment दिया गया।
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Police से FIR की मांग
घटना के बाद Hospital अधिकारियों ने Police से मामले में FIR दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा। Hospital अधिकारियों के अनुसार, घटना के बाद Staff Members औपचारिक शिकायत दर्ज कराने को लेकर आशंकित थे। इसके बाद Police से हस्तक्षेप कर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मामले में FIR दर्ज होने के बाद किन धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है या कितने लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसलिए इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि होने तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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