नई दिल्ली: नीट-यूजी परीक्षा, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और बढ़ते शैक्षणिक दबाव को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। इसी बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के कोटा दौरे और छात्रों से संवाद कार्यक्रम पर मनोचिकित्सकों ने अपनी राय रखी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों में तनाव और अवसाद के पीछे केवल कोचिंग संस्थान ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि कई अन्य सामाजिक और पारिवारिक कारण भी इसकी जड़ में हैं।
बच्चों की रुचि के खिलाफ विषय चुनना तनाव का बड़ा कारण
कोटा के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. एमएल अग्रवाल ने कहा कि छात्रों में मानसिक तनाव और अवसाद के कई छिपे हुए कारण होते हैं। उनके अनुसार, सबसे बड़ी समस्या तब पैदा होती है जब माता-पिता बच्चों की रुचि और क्षमता को नजरअंदाज कर उन पर ऐसे विषय चुनने का दबाव डालते हैं, जिनमें उनकी कोई दिलचस्पी नहीं होती।
उन्होंने कहा, “जब किसी छात्र को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी विशेष विषय या करियर की ओर धकेला जाता है, तभी से मानसिक दबाव शुरू हो जाता है। कई बार शिक्षक भी छात्रों को एक निश्चित दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।”
परीक्षा से पहले राजनीतिक कार्यक्रमों पर उठाए सवाल
राहुल गांधी के कोटा में आयोजित कार्यक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा कि भारतीय राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच मुद्दों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण होना सामान्य बात है। हालांकि, उन्होंने परीक्षा से ठीक पहले होने वाले राजनीतिक आयोजनों को लेकर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम कुछ छात्रों का ध्यान उनकी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी से भटका सकते हैं। इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को इस तरह की गतिविधियों से दूरी बनाकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उद्देश्य के आधार पर तय होगी कार्यक्रम की प्रासंगिकता
दिल्ली के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. राजीव मेहता ने कहा कि किसी भी रैली या कार्यक्रम का मूल्यांकन उसके उद्देश्य के आधार पर किया जाना चाहिए।
उनके अनुसार, यदि किसी कार्यक्रम का मकसद केवल विरोध प्रदर्शन करना है, तो वह किसी भी समय आयोजित किया जा सकता है। लेकिन यदि उसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए सरकार पर दबाव बनाना है, तो इसे सकारात्मक पहल माना जा सकता है।
छात्रों का मनोबल गिरने नहीं देना चाहिए
जयपुर के मनोचिकित्सक डॉ. शिव गौतम ने भी परीक्षा से पहले राजनीतिक सभाओं के आयोजन पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में छात्रों का आत्मविश्वास और मनोबल बनाए रखना सबसे जरूरी है।
डॉ. गौतम ने कहा कि राजनीतिक दलों को अपने राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर छात्रों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने नीट-यूजी परीक्षा के दोबारा आयोजन को छात्रों के लिए अतिरिक्त मानसिक दबाव का कारण बताया, हालांकि यह भी कहा कि सरकार इस बार परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में प्रयास कर रही है।
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ती चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव, करियर को लेकर अनिश्चितता, पारिवारिक अपेक्षाएं और सामाजिक तुलना छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में माता-पिता, शिक्षकों और नीति-निर्माताओं की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर दें तथा सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराएं।
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