नई दिल्ली, 6 मई।
भारत और जापान ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य अनुसंधान और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिससे रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होने की उम्मीद है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, ये समझौते केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और जापान की विज्ञान एवं तकनीक नीति मंत्री किमी ओनोडा के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान हुए।
हेल्थ रिसर्च में सहयोग बढ़ेगा
स्वास्थ्य और मेडिकल उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoC) पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें Japan Agency for Medical Research and Development, Indian Council of Medical Research और Department of Science and Technology शामिल हैं।
इस समझौते से संयुक्त अनुसंधान, नई तकनीकों के विकास और हेल्थ सेक्टर में क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
क्वांटम टेक्नोलॉजी में भी नई पहल
इसके अलावा, क्वांटम विज्ञान और तकनीक में सहयोग के लिए जापान के कैबिनेट कार्यालय और भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बीच एक लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) पर हस्ताक्षर किए गए। इससे भविष्य की उन्नत तकनीकों में संयुक्त शोध और नवाचार के नए रास्ते खुलेंगे।
पीएम मोदी की यात्रा से मिला आधार
सरकार के मुताबिक, यह सहयोग नरेंद्र मोदी की अगस्त 2025 में जापान यात्रा के दौरान हुए समझौतों पर आधारित है, जिसमें विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी थी।
भारत-जापान की ताकत बनेगी साझेदारी
बैठक में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और जापान के बीच विज्ञान और तकनीक में स्वाभाविक तालमेल है। जापान की उन्नत तकनीक और भारत के कुशल मानव संसाधन मिलकर बेहतर परिणाम दे सकते हैं।
उन्होंने बताया कि भारत में क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर-फिजिकल सिस्टम, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, स्वच्छ ऊर्जा और एडवांस कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम हो रहा है, जिससे संयुक्त रिसर्च के नए अवसर बन रहे हैं।
वहीं, किमी ओनोडा ने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग की सराहना की।
निष्कर्ष
भारत और जापान के बीच यह सहयोग न केवल हेल्थ और टेक्नोलॉजी सेक्टर को मजबूती देगा, बल्कि आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर नवाचार और रिसर्च के क्षेत्र में भी दोनों देशों की भूमिका को और प्रभावी बनाएगा।
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