नई दिल्ली, 24 अगस्त 2026
देश के कई हिस्सों में Sugar Prices में अचानक तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। पिछले एक साल की तुलना में खुदरा और थोक कीमतों में करीब 40% तक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि कुछ राज्यों में यह बढ़ोतरी 50% तक पहुंच गई है। 23 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹62.47 प्रति किलोग्राम रही, जो एक साल पहले ₹46.30 प्रति किलोग्राम थी। ओडिशा में कीमत ₹67.40 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। इस तेजी को लेकर विपक्ष ने गन्ने को Ethanol उत्पादन की ओर मोड़ने की नीति पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार ने इस वजह को खारिज करते हुए कम उत्पादन, त्योहारी मांग, मौसम और सीमित वैश्विक आपूर्ति समेत कई कारण बताए हैं।
दाम में अचानक इतनी तेजी क्यों?
Sugar Prices में बढ़ोतरी केवल एक कारण से नहीं जुड़ी है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू उत्पादन उम्मीद से कम रहने, त्योहारी मौसम से पहले मांग बढ़ने, गन्ने की फसल पर मौसम का असर, वैश्विक स्तर पर Sugar की आपूर्ति में कमी तथा बाजार में जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों को कीमत बढ़ने के संभावित कारणों में शामिल किया गया है। 23 अगस्त तक देश की औसत खुदरा कीमत एक महीने पहले के ₹48.62 से बढ़कर ₹62.47 प्रति किलोग्राम हो गई। यानी करीब एक महीने में लगभग 28.5% की वृद्धि हुई। कई राज्यों में पिछले साल की तुलना में 40% से 50% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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Ethanol को लेकर सरकार-विपक्ष आमने-सामने
Sugar Prices की मौजूदा तेजी पर सबसे बड़ा राजनीतिक विवाद Ethanol को लेकर है। विपक्ष का आरोप है कि गन्ने को Ethanol बनाने में इस्तेमाल किए जाने के कारण चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई और इससे कीमतें बढ़ीं। किसान संगठनों के कुछ प्रतिनिधियों ने भी सरकार की नीतियों और बड़े कारोबारियों द्वारा संभावित जमाखोरी पर सवाल उठाए हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने Ethanol को कीमत बढ़ने का प्रमुख कारण मानने से इनकार किया है। सरकार के अनुसार, 2022-23 में गन्ने से Ethanol के लिए जाने वाला हिस्सा करीब 12% था, जो 2025-26 में घटकर करीब 9% रह गया है। साथ ही देश में उत्पादित Ethanol का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, विशेष रूप से मक्का, से आता है।
सरकार ने उठाए ये कदम
बढ़ती Sugar Prices को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने बाजार में उपलब्धता बढ़ाने और जमाखोरी पर रोक लगाने की दिशा में कदम उठाए हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख मीट्रिक टन Sugar के आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा सरकार ने 1 अगस्त से 30 नवंबर तक Sugar कारोबारियों के लिए 400 टन की Stock Limit लागू की है। 1 सितंबर से Bulk Consumers को 15 दिनों की खपत से अधिक Sugar रखने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का कहना है कि कीमतों पर लगातार नजर रखी जा रही है। वहीं भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक लाल सिंह गंगवार के अनुसार, त्योहारी मौसम में खुदरा कीमतों में करीब 10% तक सामान्य वृद्धि देखने को मिलती रही है, जबकि इस बार वृद्धि उससे कहीं अधिक है।
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क्या किसानों और कारोबारियों के दावे भी अलग हैं?
Sugar Prices को लेकर किसान संगठनों की राय सरकार से अलग है। महाराष्ट्र के गन्ना किसान और All India Kisan Sabha के नेता अजित नवले ने दावा किया कि मौजूदा तेजी को केवल उत्पादन में कमी से जोड़ना उचित नहीं है। उनके अनुसार देश में सालाना करीब 320-340 लाख टन Sugar उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत करीब 280-290 लाख टन है। उन्होंने मौजूदा Stock को करीब 38 लाख टन बताते हुए कहा कि यह पिछले साल के करीब 42 लाख टन से कम जरूर है, लेकिन इतनी कमी नहीं है कि खुदरा कीमतों में 40% तक उछाल आए। उन्होंने त्योहारी मौसम से पहले बड़े कारोबारियों द्वारा जमाखोरी और कालाबाजारी की आशंका भी जताई है। हालांकि ये आरोप किसान संगठन की ओर से हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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