गर्भावस्था शुरू होने से पहले शरीर में मौजूद दो या उससे अधिक बीमारियों की वजह से महिलाओं में Miscarriage का खतरा 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। नई रिसर्च में यह भी सामने आया है कि ऐसी महिलाओं में गंभीर उल्टी और मिचली (Nausea and Vomiting) का खतरा 69 प्रतिशत अधिक हो सकता है, जबकि डिप्रेशन और एंग्जायटी का खतरा लगभग चार गुना पाया गया। यह स्टडी The Lancet Public Health जर्नल में प्रकाशित हुई है, जिसमें 2000 से 2022 के बीच दर्ज 22 लाख से अधिक प्रेग्नेंट महिलाओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।
20% बढ़ा Miscarriage का खतरा
रिसर्च के मुताबिक, प्रेग्नेंसी की शुरुआत में जिन महिलाओं को पहले से एक से अधिक स्वास्थ्य समस्याएं थीं, उनमें Miscarriage का खतरा उन महिलाओं के मुकाबले काफी ज्यादा देखा गया जिन्हें कोई पुरानी बीमारी नहीं थी। रिसर्चर्स के अनुसार, एक से अधिक बीमारियों का होना सिर्फ अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं का जोड़ नहीं है, बल्कि प्रेग्नेंसी के दौरान रिस्क असेसमेंट में इसे एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में देखा जाना चाहिए। स्टडी में ऐसी महिलाओं में Gestational Diabetes, हाई ब्लड प्रेशर और Pre-eclampsia जैसी गंभीर जटिलताओं का खतरा भी अधिक पाया गया।
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Anxiety-Depression का Risk भी अधिक
स्टडी का एक महत्वपूर्ण पहलू प्रेग्नेंसी के दौरान मेंटल हेल्थ से जुड़ा है। एक्सपर्ट्स ने पाया कि दो या उससे अधिक पुरानी बीमारियों से जूझ रही महिलाओं में एंग्जायटी और डिप्रेशन का खतरा लगभग चार गुना था। इसके अलावा, इनमें जी मिचलाने और उल्टी की गंभीर समस्या का खतरा 69 प्रतिशत अधिक देखा गया। रिसर्च टीम का कहना है कि ऐसे मामलों में महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को अलग-अलग देखने के बजाय एक साथ जांचने की जरूरत है, ताकि Miscarriage के खतरे के साथ-साथ अन्य जटिलताओं का समय रहते इलाज किया जा सके।
खून का थक्का जमने और हाई बीपी का जोखिम
वैज्ञानिकों को ऐसी महिलाओं में प्रेग्नेंसी से जुड़ी अन्य गंभीर समस्याएं भी देखने को मिलीं। स्टडी के अनुसार, इनमें ब्लड क्लॉट का खतरा दोगुने से अधिक था, जबकि प्री-एक्लेमप्सिया का खतरा 42 प्रतिशत अधिक पाया गया। जैसे-जैसे बीमारियों की संख्या बढ़ी, ये खतरे भी बढ़ते गए। उदाहरण के लिए, तीन या उससे अधिक बीमारियों से पीड़ित महिलाओं में ब्लड क्लॉट बनने का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में साढ़े तीन गुने से भी ज्यादा दर्ज किया गया।
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22 लाख मामलों की जांच से खुलासा
इस रिसर्च का नेतृत्व King’s College London के वैज्ञानिकों ने किया। टीम ने ब्रिटेन के अलग-अलग हेल्थ डेटाबेस से 22 लाख से अधिक मामलों का डेटा खंगाला। रिसर्चर्स ने सलाह दी है कि प्रेग्नेंसी के शुरुआती दौर में ही ऐसी महिलाओं की पहचान की जानी चाहिए और मैटरनिटी सर्विस के साथ उनके मेंटल और फिजिकल हेल्थ का सही तालमेल बनाया जाना चाहिए। हालांकि, रिसर्चर्स ने यह भी साफ किया कि यह सिर्फ रिकॉर्ड्स पर आधारित एक Observational Study थी, इसलिए इसके नतीजों को लेकर आगे भी और रिसर्च की जरूरत है।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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