चंडीगढ़, 15 अगस्त 2026
PCPNDT Act से जुड़े एक मामले में Punjab and Haryana High Court ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी Doctor का नाम Diagnostic Centre की Registration Panel में दर्ज रह जाने मात्र से उसे वहां हुए कथित अवैध कार्यों के लिए Criminally Liable नहीं ठहराया जा सकता। Court ने स्पष्ट किया कि Criminal Liability तय करने के लिए Doctor की Active Involvement, Physical Participation या Conspiracy से जुड़ा ठोस Prima Facie Material होना जरूरी है। यह फैसला उस मामले में आया, जिसमें Doctor ने वर्ष 2012 में Diagnostic Centre छोड़ दिया था, लेकिन उसका नाम Registration Panel से हटाया नहीं गया था। Court ने निचली अदालत द्वारा दी गई Discharge को बहाल कर दिया।
PCPNDT केस में Court ने क्या कहा?
Punjab and Haryana High Court ने कहा कि केवल Administrative Delay या Registration Records में Doctor का नाम अपडेट न होने को Criminal Offence या Conspiracy का आधार नहीं बनाया जा सकता। Court के अनुसार PCPNDT Act के तहत किसी Doctor के खिलाफ Criminal Prosecution के लिए ऐसा Material होना चाहिए, जो उसे कथित Illegal Sex Determination से सीधे जोड़ता हो। Bench ने यह भी कहा कि यदि Doctor घटना के समय Diagnostic Centre में मौजूद नहीं था और उसके Active Participation या Conspiracy का कोई Prima Facie Evidence नहीं है, तो केवल पुराने Registration के आधार पर Criminal Case आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। Court ने माना कि इस मामले में Doctor की भूमिका साबित करने वाला पर्याप्त Material मौजूद नहीं था।
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2016 की Raid से शुरू हुआ था मामला
मामला जुलाई 2016 में Haryana के Hansi स्थित एक Diagnostic Centre पर Health Department की संयुक्त टीम की Raid से जुड़ा है। अधिकारियों को कथित Illegal Prenatal Sex Determination की सूचना मिली थी, जिसके बाद कार्रवाई की गई और FIR दर्ज हुई। मामले में बाद में Dr. Shyam Bihari को भी आरोपी बनाया गया। हालांकि Court के रिकॉर्ड के अनुसार Raid के समय उनका नाम Original FIR या Spot Memo में नहीं था और मौके से मिले Ultrasound Report तथा Mandatory Form ‘F’ में दूसरे Radiologist का नाम दर्ज था। जांच में सामने आए Attendance Records के अनुसार Raid वाले दिन Dr. Shyam Bihari Gurgaon में एक अन्य Diagnostic Centre में Consultant Radiologist के तौर पर मौजूद थे।
जांच के दौरान Doctor ने बताया कि वह Hansi स्थित Diagnostic Centre से 5 नवंबर 2012 को ही अलग हो चुके थे और इसके बाद Delhi तथा Gurgaon में Practice कर रहे थे। Police द्वारा जब्त किए गए Attendance Records में भी Raid की तारीख पर Gurgaon में उनकी उपस्थिति दर्ज थी, जबकि Hansi के Diagnostic Centre के Attendance Register में दूसरे Doctor की उपस्थिति दर्ज थी और Dr. Shyam Bihari का नाम नहीं था। इसके बावजूद उनका नाम पुराने Registration Panel में बना हुआ था, जिसके आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ी।
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Registration Panel में नाम बना रहना बना विवाद का आधार
मामले में Trial Court ने 12 अप्रैल 2017 को Doctor को Discharge कर दिया था। Court ने माना था कि कथित घटना के समय उनकी मौजूदगी या Conspiracy में शामिल होने का कोई पर्याप्त Material नहीं है। इसके बाद State ने इस आदेश को चुनौती दी। Additional Sessions Judge, Hisar ने 29 अक्टूबर 2018 को Discharge Order को रद्द करते हुए Trial Court को Charge पर नए सिरे से आदेश देने को कहा। Revisional Court ने मुख्य रूप से यह माना था कि Diagnostic Centre की Registration Panel में Doctor का नाम अभी भी दर्ज था और इसे उनकी Association का आधार माना जा सकता है। साथ ही दो अलग-अलग जिलों में Registration को लेकर भी सवाल उठाया गया था।
High Court में Doctor की ओर से दलील दी गई कि वह Raid के समय Diagnostic Centre में मौजूद ही नहीं थे और उनके खिलाफ किसी तरह की Active Participation या Conspiracy का Evidence नहीं है। Court ने Investigation Records और उपलब्ध Documents की समीक्षा करने के बाद इस दलील को स्वीकार किया। PCPNDT मामले में Court ने कहा कि केवल पुराने Registration Record को आधार बनाकर किसी Medical Practitioner को Criminal Prosecution का सामना नहीं कराया जा सकता, जब तक कथित अपराध से उसका वास्तविक संबंध स्थापित करने वाला ठोस Material मौजूद न हो।
दो जिलों में Registration पर भी Court की टिप्पणी
High Court ने PCPNDT Rules, 1996 के Rule 3(3)(3) की भी व्याख्या की। Court ने कहा कि इस प्रावधान में Registration से जुड़ी सीमा एक ही District के भीतर स्थित Diagnostic Centres पर लागू होती है। Court के अनुसार अलग-अलग Districts या अलग States में स्थित Diagnostic Centres में Qualified Medical Practitioner के Registration पर इस प्रावधान के तहत स्वतः रोक नहीं लगती। मामले में Doctor का Registration Hisar District के Janta Diagnostic Centre और Gurgaon District के Health Map Diagnostic, Civil Hospital से संबंधित था। इसलिए Court ने माना कि अलग-अलग जिलों में Registration होने को अपने आप PCPNDT Rules का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
Court ने यह भी नोट किया कि Rule 3(3)(3) की वैधानिकता को विभिन्न High Courts के समक्ष चुनौती दी गई थी और इसके Operation पर Stay भी दिया गया था। इसके बाद Bench ने Additional Sessions Judge, Hisar के 2018 के आदेश को रद्द कर दिया और 12 अप्रैल 2017 का Trial Court का Discharge Order बहाल कर दिया। Court ने निष्कर्ष दिया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर Doctor के खिलाफ PCPNDT Act या IPC के तहत Prima Facie Case नहीं बनता।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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