नई दिल्ली, 6 अगस्त 2026
NBEMS ने अपने Accreditation Process में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए नए Accreditation Criteria और Mandatory Disclosure नियम जारी किए हैं। संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत अब मान्यता प्राप्त और मान्यता के लिए आवेदन करने वाले अस्पतालों को अधिक पारदर्शिता के साथ आवश्यक जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इसके साथ ही Trainee Verification प्रक्रिया को भी पहले से अधिक सख्त बनाया गया है। NBEMS का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखना और संस्थानों में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
Trainee Verification उल्लंघन पर लगेगा जुर्माना
नए नियमों के अनुसार यदि कोई अस्पताल Trainee Verification से जुड़े दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उस पर ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा संस्थानों को प्रशिक्षुओं से जुड़ी जानकारी और अन्य आवश्यक विवरण समय-समय पर निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराने होंगे। NBEMS ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इन प्रावधानों का उद्देश्य प्रशिक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।
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Hospitals को करने होंगे Mandatory Disclosures
संशोधित नियमों के तहत NBEMS ने अस्पतालों के लिए कई Mandatory Disclosures भी अनिवार्य किए हैं। संस्थानों को अपनी प्रशिक्षण क्षमता, फैकल्टी, सुविधाओं और प्रशिक्षुओं से संबंधित आवश्यक जानकारी निर्धारित व्यवस्था के अनुसार साझा करनी होगी। इससे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। NBEMS का मानना है कि इन बदलावों से Accreditation प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और संस्थानों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।
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Training Standards मजबूत करने पर जोर
संशोधित NBEMS Accreditation Criteria का उद्देश्य मेडिकल प्रशिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। नए दिशा-निर्देशों के माध्यम से प्रशिक्षण प्रक्रिया की नियमित निगरानी, रिकॉर्ड के सत्यापन और निर्धारित मानकों के अनुपालन पर अधिक जोर दिया गया है। NBEMS ने सभी संबद्ध अस्पतालों से नए नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनी रहे और प्रशिक्षुओं के हितों की बेहतर सुरक्षा की जा सके।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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