गाज़ियाबाद, 24 जून 2026
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले स्वायत्त संस्थान, इंडियन फार्माकोपिया आयोग (Indian Pharmacopoeia Commission – IPC) ने अपने गाज़ियाबाद स्थित परिसर में एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया है। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य विषय “IP 2026 के माध्यम से रक्त एवं रक्त के घटकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना” रखा गया। इसका उद्देश्य इंडियन फार्माकोपिया (IP) 2026 में हाल ही में शामिल किए गए रक्त और रक्त के घटकों से जुड़े नए मोनोग्राफ़ के बारे में देश भर के हितधारकों के बीच जागरूकता बढ़ाना और उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए तैयार करना है।
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छह राज्यों के प्रतिनिधियों की भागीदारी
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के छह प्रमुख राज्यों—उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश के 160 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इन प्रतिभागियों में ब्लड सेंटर के अनुभवी पेशेवर, गुणवत्ता आश्वासन (Quality Assurance) और गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) अधिकारी, राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण (State Licensing Authorities), हेमोविजिलेंस विशेषज्ञ और विभिन्न राज्यों के सरकारी स्वास्थ्य अधिकारी शामिल थे। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव (औषधि एवं खाद्य विनियमन) श्री हर्ष मंगला ने वर्चुअल माध्यम से आईपीसी के इन प्रयासों की सराहना की और सभी से मरीजों के कल्याण की रक्षा के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
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नए मानकों का महत्व और प्रभाव
आईपीसी के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलाइसैल्वन ने इस बात पर विशेष रूप से प्रकाश डाला कि IP 2026 में शामिल किए गए रक्त घटकों के नए मानक रक्ताधान सेवाओं (Blood Transfusion Services) में गुणवत्ता आश्वासन, रोगी सुरक्षा और नियामक अनुपालन को मजबूत करने में गेम-चेंजर साबित होंगे। ये नए मानक पूरी तरह से समकालीन वैज्ञानिक प्रगतियों और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की नियामक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए गए हैं। उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सलाहकार और आईपीसी के पूर्व सचिव डॉ. जी. एन. सिंह भी उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. जय प्रकाश के स्वागत भाषण से हुई।
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तकनीकी सत्र और भविष्य की रणनीति
सम्मेलन के दौरान रक्त और उसके घटकों से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर गहन चर्चा के लिए कई विशेष सत्र आयोजित किए गए। इनमें IP 2026 मानकों, नियामक आवश्यकताओं, रक्त के तर्कसंगत उपयोग, प्लाज्मा की गुणवत्ता, भारत की राष्ट्रीय औषध-सूची (National Formulary of India) और भारत के हीमोविजिलेंस कार्यक्रम (Haemovigilance Programme of India) जैसे विषयों को शामिल किया गया। अंत में आयोजित एक पैनल चर्चा में आईपीसी, राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों और ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन संस्थानों के विशेषज्ञों ने नए नियमों को लागू करने की व्यावहारिक रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया, ताकि देश भर के ब्लड बैंक इन वैश्विक मानकों को बिना किसी बाधा के अपना सकें।
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