नई दिल्ली, 24 जून 2026
देश के चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र से एक बेहद महत्वपूर्ण और नीतिगत खबर सामने आ रही है। National Medical Commission (NMC) अपने उस विवादास्पद प्रस्ताव पर दोबारा विचार करने की योजना बना रहा है, जिसमें मेडिकल कॉलेजों के विभागों में तीन साल के लिए रोटेशनल हेडशिप (3-Year Rotatory Headship) लागू करने की बात कही गई थी। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, कमीशन अब इस रोटेशन प्रणाली को अनिवार्य बनाने के बजाय चिकित्सा संस्थानों में वर्तमान में चल रही मेरिट और वरिष्ठता आधारित विभागाध्यक्ष (HoD) नियुक्ति प्रणाली को ही बनाए रखने (Retain) पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
रोटेशन नीति पर भारी विरोध
दरअसल, नेशनल मेडिकल कमीशन के पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (PGMEB) ने हाल ही में ‘पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन 2023’ (PGMER 2023) के तहत इस 3-वर्षीय रोटेशनल हेडशिप के नियम को अधिसूचित किया था। इस नए नियम का उद्देश्य जूनियर फैकल्टी को भी नेतृत्व का अवसर देना था, लेकिन चिकित्सा जगत के वरिष्ठ प्रोफेसरों और विभिन्न एसोसिएशनों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। चिकित्सा विशेषज्ञों का तर्क है कि रोटेशन सिस्टम लागू होने से विभागों के सुचारू संचालन, शैक्षणिक निरंतरता और प्रशासनिक स्थिरता पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिसके बाद कमीशन को अपनी इस नीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
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मेरिट आधारित सिस्टम के फायदे
विभिन्न चिकित्सा संगठनों और अकादमिक विशेषज्ञों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और NMC को सौंपे अपने ज्ञापनों में स्पष्ट किया है कि विभागाध्यक्ष (HoD) का पद केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए व्यापक अकादमिक अनुभव, अनुसंधान विशेषज्ञता और दीर्घकालिक विजन की आवश्यकता होती है। वरिष्ठ डॉक्टरों का मानना है कि रोटेशन प्रणाली से विभागों के भीतर गुटबाजी और प्रशासनिक अस्थिरता बढ़ने का खतरा है, जबकि वर्तमान योग्यता और वरिष्ठता आधारित व्यवस्था (Merit-Based System) चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम है। इसी व्यापक विरोध और व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए नेशनल मेडिकल कमीशन अब इस नीति में बड़े बदलाव की तैयारी में है।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मंथन
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और नेशनल मेडिकल कमीशन के शीर्ष अधिकारियों के बीच हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की गई है। इस बैठक में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता किए बिना दोनों पक्षों के हितों की रक्षा करने पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। माना जा रहा है कि NMC जल्द ही एक नया आधिकारिक स्पष्टीकरण या संशोधन पत्र जारी कर सकता है, जिसमें रोटेटरी हेडशिप के नियम को स्वैच्छिक बनाने या इसे पूरी तरह से वापस लेकर पुरानी मेरिट-आधारित व्यवस्था को ही हरी झंडी देने की घोषणा की जा सकती है। इस संभावित फैसले पर देश भर के मेडिकल कॉलेजों की निगाहें टिकी हुई हैं।
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