नई दिल्ली | 9 जून 2026
World Eye Donation Day के अवसर पर विशेषज्ञों ने नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। आधुनिक नेत्र चिकित्सा के अनुसार किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसकी आंखों का Cornea कुछ समय तक उपयोग योग्य रहता है, जिससे एक मृत दाता कई नेत्रहीन लोगों की दृष्टि बहाल करने में मदद कर सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक Corneal Transplant तकनीकों ने नेत्रदान की उपयोगिता और सफलता दर दोनों को पहले की तुलना में काफी बढ़ा दिया है।
आधुनिक तकनीक ने बढ़ाई Corneal Transplant की सफलता
विशेषज्ञों के अनुसार पहले Corneal Transplant में पूरे Cornea को बदलने की प्रक्रिया अपनाई जाती थी, जिसे Penetrating Keratoplasty कहा जाता है। हालांकि अब नेत्र चिकित्सा क्षेत्र में Lamellar Keratoplasty जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में Cornea की केवल प्रभावित परत को बदला जाता है, जिससे मरीज को बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है। चिकित्सकों के मुताबिक इस तकनीक की Clinical Success Rate 90 प्रतिशत से अधिक बताई जाती है और इसमें Graft Rejection का जोखिम भी अपेक्षाकृत कम होता है। यही कारण है कि Corneal Blindness के उपचार में यह तकनीक तेजी से अपनाई जा रही है।
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नेत्रदान को लेकर फैली भ्रांतियों पर विशेषज्ञों की राय
राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) ने नेत्रदान से जुड़े कई प्रचलित मिथकों को खारिज किया है। विशेषज्ञों के अनुसार नेत्रदान के लिए किसी अधिकतम आयु सीमा का निर्धारण नहीं किया गया है। यदि Cornea स्वस्थ और पारदर्शी है तो बुजुर्ग व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं। इसके अलावा यह धारणा भी गलत है कि नेत्रदान से मृतक का चेहरा विकृत हो जाता है। चिकित्सा प्रक्रिया के दौरान केवल आवश्यक ऊतक निकाले जाते हैं और जरूरत पड़ने पर कृत्रिम Prosthetic Eye का उपयोग किया जाता है, जिससे चेहरे की सामान्य संरचना बनी रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन भ्रांतियों के कारण अब भी बड़ी संख्या में संभावित दान नहीं हो पाते हैं।
परिवार की सहमति से भी संभव है नेत्रदान
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने जीवनकाल में नेत्रदान का संकल्प नहीं लिया हो, तब भी मृत्यु के बाद उसके परिवार के सदस्य या कानूनी उत्तराधिकारी नेत्रदान की अनुमति दे सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार की समय पर सहमति कई जरूरतमंद मरीजों के लिए दृष्टि बहाली का अवसर बन सकती है। इसके साथ ही Digital India पहल के तहत नेत्रदान के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। नागरिक National Organ and Tissue Transplant Organization (NOTTO) की वेबसाइट पर जाकर आवश्यक पहचान दस्तावेजों के साथ अपना संकल्प दर्ज कर सकते हैं।
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समय पर निर्णय नेत्रदान की सफलता के लिए जरूरी
नेत्रदान की प्रक्रिया में समय को सबसे महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार मृत्यु के बाद लगभग 6 घंटे के भीतर Cornea को सुरक्षित रूप से प्राप्त किया जाना चाहिए, ताकि उसका प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया जा सके। इसी कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञ परिवारों से अपील करते हैं कि वे नेत्रदान के महत्व को समझें और आवश्यकता पड़ने पर समय रहते संबंधित Eye Bank या स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क करें। उनका मानना है कि एक नेत्रदाता कई लोगों के जीवन में रोशनी और आत्मनिर्भरता वापस लाने का माध्यम बन सकता है।
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