नई दिल्ली, 15 मई 2026
द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में वर्ष 2026 के लिए National Florence Nightingale Award प्रदान किए। इस अवसर पर देशभर के विभिन्न राज्यों और स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़ी 15 नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों को नर्सिंग सेवा, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और समाज के प्रति उत्कृष्ट समर्पण के लिए सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति ने नर्सों की भूमिका को बताया स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि नर्सिंग कर्मी सेवा, करुणा और समर्पण के सर्वोच्च मानकों का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि नर्सें अक्सर सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाती हैं।
इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री Jagat Prakash Nadda और केंद्रीय राज्य मंत्री Prataprao Jadhav भी उपस्थित रहे।
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International Nurses Day पर नर्सों के योगदान को सराहा गया
International Nurses Day के अवसर पर केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि इस वर्ष की थीम “Our Nurses. Our Future. Caring for nurses strengthens economies” नर्सों की अहम भूमिका को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि नर्सें स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ देश की प्रगति को भी गति देती हैं। उन्होंने नर्सों के कल्याण में निवेश को स्वस्थ समाज और मजबूत भविष्य की आवश्यकता बताया।
क्या है National Florence Nightingale Award
National Florence Nightingale Award स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा स्थापित एक प्रतिष्ठित सम्मान है। यह पुरस्कार नर्सिंग पेशे में निष्ठा, करुणा और दृढ़ता के सम्मान में दिया जाता है। यह सम्मान केंद्र और राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं में कार्यरत Registered Nurses, Midwives, Auxiliary Nurse Midwives (ANM) और महिला स्वास्थ्य परिचारिकाओं को प्रदान किया जाता है।
प्रत्येक पुरस्कार विजेता को प्रशस्ति पत्र, एक लाख रुपये की नकद राशि और पदक प्रदान किया जाता है। इसे स्वास्थ्य क्षेत्र में नर्सों की अमूल्य सेवाओं के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है।
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इन 15 स्वास्थ्यकर्मियों को मिला सम्मान
इस वर्ष सम्मानित होने वालों में लद्दाख की सुश्री कुलविंदर परही, महाराष्ट्र की सुश्री उज्वला महादेव सोयम, मिजोरम की सुश्री लालेंथांगी हनमते, सिक्किम की सुश्री मधु माला गुरुंग, उत्तराखंड की सुश्री पूजा परमार राणा, पश्चिम बंगाल की सुश्री गीता कर्माकर, चंडीगढ़ की सुश्री पूनम वर्मा, दादरा और नगर हवेली एवं दमन-दीव की सुश्री दीपा बिजू, दिल्ली के डॉ. श्रवण कुमार ढाका, गोवा की सुश्री रक्षा रूपो पर्वतकर, कर्नाटक की सुश्री कविता जगन्नाथ, केरल की सुश्री मंजू मोल वीएस, लक्षद्वीप की सुश्री आयशा बीबी के, तमिलनाडु के प्रो. (डॉ.) आर शंकर षनमुगम तथा रक्षा मंत्रालय (सेना) मुख्यालय, दिल्ली की मेजर जनरल लिसाम्मा पीवी शामिल हैं।
स्वास्थ्य नीति और Nursing Leadership में भी अहम भूमिका
सरकार ने कहा कि नर्सें केवल मरीजों की देखभाल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य नीति निर्माण, नेतृत्व और वैज्ञानिक निर्णय प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मरीजों के सबसे करीब होने के कारण नर्सें स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक जरूरतों को बेहतर तरीके से समझती हैं।
केंद्र सरकार ने Nursing Education को मजबूत करने पर दिया जोर
भारत सरकार ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में National Nursing and Midwifery Commission Act के माध्यम से नर्सिंग शिक्षा और प्रशिक्षण को आधुनिक बनाने की दिशा में कई पहल की हैं। सरकार ने मेडिकल कॉलेजों के साथ 157 Nursing Colleges स्थापित करने की योजना पर भी जोर दिया है, ताकि देश में कुशल और सशक्त Nursing Workforce तैयार की जा सके।
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