नई दिल्ली, 13 अगस्त 2026
Supreme Court ने Postgraduate Medical Admission से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण राहत देते हुए कहा है कि यदि किसी Meritorious Candidate को गलत तरीके से Admission से वंचित किया गया है, तो Court संविधान के Article 142 के तहत उसे राहत देने के लिए Additional Seat बनाने या किसी अन्य तरीके से accommodate करने का आदेश दे सकता है। मामले में Court ने एक vacant NRI Seat को MD Community Medicine से बदलकर MS Obstetrics-Gynaecology Seat में परिवर्तित करने का निर्देश दिया, जिससे दो Postgraduate Medical Candidates को accommodate किया जा सके।
Admission से वंचित करने का मामला
यह मामला Maharishi Markandeshwar College of Medical Science and Research, Sadopur, Ambala, जो Maharishi Markandeshwar University से संबंधित है, में MS Obstetrics-Gynaecology में Postgraduate Admission से जुड़ा था। Medical Dialogues के अनुसार, दो Postgraduate Medical Candidates ने Supreme Court का रुख किया था। उनका विवाद Admission प्रक्रिया में हुई ऐसी स्थिति से संबंधित था, जिसके कारण योग्य उम्मीदवार को इच्छित Postgraduate Medical Seat नहीं मिल सकी। Court ने मामले पर विचार करते हुए यह देखा कि जब किसी उम्मीदवार को Admission से गलत तरीके से वंचित किया जाता है, तो केवल सामान्य Admission प्रक्रिया के आधार पर उसे राहत से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
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Article 142 से मिली राहत
Bench में Justice Prashant Kumar Mishra और Justice Sanjeev Sachdeva शामिल थे। Court ने Article 142 के तहत अपनी संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में न्याय सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त Seat बनाई जा सकती है या Candidate को किसी अन्य उपयुक्त तरीके से accommodate किया जा सकता है। Court ने इसी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए एक vacant NRI Seat को MD Community Medicine से MS Obstetrics-Gynaecology Seat में बदलने का रास्ता अपनाया। इससे संबंधित Candidates को उनकी Postgraduate Medical Admission से जुड़ी शिकायत में राहत मिल सकी।
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Merit और Fair Admission पर जोर
Supreme Court के इस फैसले का महत्व Medical Education में Merit-based और Fair Admission Process के संदर्भ में भी है। Court ने स्पष्ट किया कि यदि Admission प्रक्रिया में किसी योग्य Candidate के साथ गलत तरीके से अन्याय होता है, तो संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करके उचित राहत दी जा सकती है। हालांकि, यह फैसला सामान्य तौर पर हर Admission विवाद में Additional Seat बनाने का आदेश नहीं देता, बल्कि Court की ओर से Article 142 के तहत विशेष परिस्थितियों में न्याय सुनिश्चित करने की शक्ति को रेखांकित करता है। मामले में Seat को एक Postgraduate Medical Course से दूसरे Course में परिवर्तित करने का निर्देश इसी विशेष परिस्थिति में दिया गया।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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