शामली, उत्तर प्रदेश, 12 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के Shamli में Saharanpur हाईवे स्थित एक Private Hospital में भर्ती कैंसर मरीज के इलाज को लेकर शनिवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया। मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर उपचार में लापरवाही, बिना अनुमति मरीज को ICU में शिफ्ट करने, वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति छिपाने और मौत के बाद भी Ventilator पर रखकर पैसे लेने का आरोप लगाया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामा हुआ, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी। वहीं अस्पताल प्रशासन ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि मरीज का उपचार चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार जारी था।
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ICU में शिफ्ट करने पर परिजनों के आरोप
जानकारी के अनुसार, मेरठ जिले के गांव राछोटी निवासी देवेंद्र को 9 जुलाई को कैंसर के इलाज के लिए सहारनपुर हाईवे स्थित गंगा अमृत हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि शुक्रवार देर रात अस्पताल ने उनकी अनुमति के बिना मरीज को ICU में शिफ्ट कर दिया। इसके बाद उन्हें मरीज से मिलने नहीं दिया गया और लगातार दवाइयां तथा अन्य मेडिकल सामान मंगवाया जाता रहा। परिजनों का कहना है कि अस्पताल ने मरीज की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं की। शनिवार को उन्होंने आरोप लगाया कि मरीज की मौत हो चुकी है, लेकिन अस्पताल प्रशासन शव सौंपने के बजाय इलाज जारी होने की बात कहता रहा। इसी को लेकर अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।
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Hospital ने Brain Dead होने का किया दावा
घटना के बाद अस्पताल के हेड डॉ. सुनील पंवार ने परिजनों के आरोपों को खारिज किया। उनके अनुसार मरीज Brain Dead की स्थिति में पहुंच चुका है, लेकिन उसका हृदय अभी भी Ventilator Support के कारण कार्य कर रहा है। अस्पताल का कहना है कि ऐसे मामलों में निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत उपचार जारी रखा जाता है और मरीज को मृत घोषित करने के लिए आवश्यक मेडिकल मानकों का पालन किया जाता है। अस्पताल प्रशासन ने यह भी कहा कि मरीज के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है।![]()
Police जांच में जुटी, बयान दर्ज शुरू
हंगामे की सूचना मिलने पर आदर्श मंडी थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और परिजनों तथा अस्पताल प्रबंधन से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। फिलहाल किसी भी पक्ष के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले ने गंभीर मरीजों के उपचार, Brain Death Protocol और अस्पतालों में पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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