नई दिल्ली, 5 जून 2026
भारत में Heart Failure (HF) से जूझ रहे मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। Indian Council of Medical Research (ICMR) द्वारा वित्तपोषित एक बड़े मल्टीसेंटर अध्ययन में सामने आया है कि बार-बार Hospitalization, लंबी अवधि तक दवाओं का सेवन और Out-of-Pocket खर्च मरीजों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं।
21 अस्पतालों के 1,859 मरीजों पर अध्ययन
Global Heart जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में देश के 21 अस्पतालों से जुड़े 1,859 Heart Failure मरीजों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन के अनुसार, मरीजों का औसत वार्षिक Out-of-Pocket खर्च कुल स्वास्थ्य व्यय का 92.6 प्रतिशत रहा, जो भारत में Heart Failure के आर्थिक प्रभाव को दर्शाता है।
Hospitalization बना सबसे बड़ा खर्च
रिपोर्ट के मुताबिक, Heart Failure से संबंधित एक Hospitalization पर औसतन करीब 1.19 लाख रुपये खर्च हुए। वहीं, प्रति मरीज औसत Out-of-Pocket खर्च 1.06 लाख रुपये से अधिक पाया गया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि लगभग 38 प्रतिशत परिवारों को Catastrophic Health Spending का सामना करना पड़ा, जबकि 17.7 प्रतिशत परिवारों ने इलाज जारी रखने के लिए कर्ज लिया या संपत्तियां बेचनी पड़ीं।
ग्रामीण मरीजों पर अधिक असर
अध्ययन में पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों पर आर्थिक दबाव अपेक्षाकृत अधिक है। ग्रामीण मरीजों में Catastrophic Health Spending की दर 45.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 30.1 प्रतिशत रही। इसके अलावा, Heart Failure का असर अपेक्षाकृत कम उम्र में देखने को मिला, जहां मरीजों की औसत आयु 55.9 वर्ष रही।
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Insurance Coverage अब भी सीमित
रिपोर्ट के अनुसार, केवल लगभग 32 प्रतिशत मरीजों के पास किसी प्रकार का Health Insurance था। बीमा कवरेज होने के बावजूद अधिकांश योजनाएं Hospitalization तक सीमित हैं और Outpatient Care तथा लंबी अवधि की दवा लागत को पर्याप्त रूप से कवर नहीं करतीं। इसके कारण मरीजों को इलाज का बड़ा हिस्सा स्वयं वहन करना पड़ता है।
क्या हो सकता है समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि Heart Failure जैसी दीर्घकालिक बीमारी के लिए किफायती और दीर्घकालिक दवा उपलब्धता, बेहतर Insurance Coverage तथा Hospitalization को कम करने वाली उपचार रणनीतियां मरीजों के आर्थिक बोझ को कम कर सकती हैं। अध्ययन में यह भी कहा गया कि Guideline-Directed Medical Therapy (GDMT) तक बेहतर पहुंच उपचार की निरंतरता बढ़ाने और दोबारा Hospitalization के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
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