हैदराबाद, 8 जुलाई 2026
Telangana High Court ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी Medical College को Bond की शर्तें लागू कराने के लिए छात्रों के Original Educational Certificates अपने पास रखने का अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि किसी छात्र ने Doctor Bond की शर्तों का उल्लंघन किया है तो कॉलेज उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई कर सकता है, लेकिन उसके मूल दस्तावेज रोककर उसे मजबूर नहीं कर सकता। इस आदेश के साथ कोर्ट ने संबंधित डॉक्टर को बड़ी राहत प्रदान की।
HC की सख्त टिप्पणी
मामला एक डॉक्टर से जुड़ा था, जिसने पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने Original Certificates वापस मांगे थे। डॉक्टर का आरोप था कि कॉलेज ने Service Bond का हवाला देकर दस्तावेज लौटाने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान Telangana High Court ने कहा कि छात्रों के मूल प्रमाणपत्रों को अपने पास रखना किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे दस्तावेज छात्र की व्यक्तिगत संपत्ति हैं और उन्हें अनावश्यक रूप से रोककर नहीं रखा जा सकता।
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Certificates रोकना गलत
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी छात्र ने Bond की शर्तों का पालन नहीं किया है, तो संस्थान के पास कानूनी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। जरूरत पड़ने पर Bond की राशि की वसूली या अन्य वैधानिक उपाय अपनाए जा सकते हैं। हालांकि, छात्र के Original Certificates को रोककर Bond लागू कराने की कोशिश कानून के अनुरूप नहीं है। अदालत ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को अपने अधिकारों का प्रयोग कानूनी दायरे में रहकर करना चाहिए।
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Bond पर क्या बोली कोर्ट?
कानूनी जानकारों के अनुसार Telangana High Court का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। कई राज्यों में Bond से जुड़े विवाद समय-समय पर सामने आते रहे हैं, जहां छात्र अपने मूल दस्तावेज वापस न मिलने की शिकायत करते हैं। ऐसे मामलों में यह आदेश स्पष्ट करता है कि Bond की शर्तों के पालन और छात्रों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। फिलहाल इस फैसले को मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक आदेश माना जा रहा है।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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