Pacemaker Implant के बाद मरीजों को केवल दवाइयों का ही नहीं, बल्कि अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती कुछ सप्ताह की सावधानी Pacemaker की सही कार्यक्षमता और मरीज की सुरक्षित रिकवरी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि डॉक्टर की सलाह का पालन नहीं किया जाता, तो संक्रमण, Lead Displacement और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए Pacemaker लगने के बाद हाथों की गतिविधि, घाव की देखभाल, नियमित Follow-up और जीवनशैली से जुड़ी सावधानियों को गंभीरता से अपनाना जरूरी है।
पहले कुछ हफ्तों में रखें ये सावधानियां
विशेषज्ञों के अनुसार Pacemaker Implant के बाद शुरुआती 4 से 6 सप्ताह तक Implant वाली तरफ के हाथ को कंधे से ऊपर उठाने, भारी सामान उठाने या अधिक जोर लगाने वाले कामों से बचना चाहिए। घाव को साफ और सूखा रखना जरूरी है तथा किसी भी प्रकार की लालिमा, सूजन, पस या तेज दर्द दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। मरीज को निर्धारित समय पर Follow-up के लिए भी जरूर जाना चाहिए, ताकि डिवाइस की कार्यक्षमता और घाव की स्थिति की जांच की जा सके।
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Mobile, Exercise और रोजमर्रा की जिंदगी में क्या करें?
डॉक्टरों का कहना है कि Pacemaker लगने के बाद सामान्य जीवन संभव है, लेकिन शुरुआत में कुछ सावधानियां जरूरी होती हैं। Mobile Phone का उपयोग किया जा सकता है, हालांकि उसे Pacemaker वाली तरफ रखने से बचना चाहिए। हल्की शारीरिक गतिविधियां डॉक्टर की सलाह के अनुसार धीरे-धीरे शुरू की जा सकती हैं, लेकिन भारी Exercise या Contact Sports से शुरुआती हफ्तों तक दूरी बनाकर रखनी चाहिए। साथ ही मरीज को अपना Pacemaker Identification Card हमेशा अपने साथ रखना चाहिए और किसी भी मेडिकल प्रक्रिया से पहले डॉक्टर को Pacemaker की जानकारी देना आवश्यक है।
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नियमित जांच से लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा Pacemaker
विशेषज्ञ बताते हैं कि Pacemaker लगाने के बाद समय-समय पर Device Check कराना बेहद जरूरी है। Follow-up के दौरान डॉक्टर बैटरी, Lead, Device Settings और Heart Rhythm की जांच करते हैं। इससे किसी भी संभावित समस्या का समय रहते पता लगाया जा सकता है। नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करने से Pacemaker लंबे समय तक प्रभावी ढंग से काम करता है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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