नई दिल्ली, 4 जून 2026
दिल्ली हाई कोर्ट ने Fortis Hospital, Shalimar Bagh से जुड़े चर्चित मेडिकल नेग्लिजेंस मामले में इलाज करने वाले दो डॉक्टरों की योग्यता की दोबारा जांच कराने का आदेश दिया है। अदालत ने National Medical Commission (NMC) और Directorate General of Health Services (DGHS) को संयुक्त जांच कर आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने क्यों दिए जांच के आदेश?
मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें एक बच्चे के परिजनों ने आरोप लगाया कि पूर्व में दिए गए अदालत के निर्देशों के बावजूद यह स्पष्ट नहीं किया गया कि संबंधित डॉक्टरों के पास भारत में Neonatal Specialist के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक मान्यता प्राप्त योग्यता थी या नहीं। इस पर अदालत ने NMC और DGHS को संयुक्त रूप से मामले की जांच करने का निर्देश दिया।
2017 के इलाज से जुड़ा है विवाद
यह मामला वर्ष 2017 में Fortis Hospital, Shalimar Bagh के Neonatal Intensive Care Unit (NICU) में हुए उपचार से संबंधित है। बच्चे के परिवार का आरोप है कि उपचार के दौरान हुई कथित लापरवाही के कारण उसे गंभीर और स्थायी मस्तिष्क क्षति हुई। बाद में विवाद केवल उपचार तक सीमित न रहकर इलाज करने वाले डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता और विशेषज्ञता तक पहुंच गया।
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डॉक्टरों की योग्यता सवालों के घेरे में
इस मामले में पहले भी National Medical Commission और Delhi Medical Council के समक्ष डॉक्टरों की योग्यता को लेकर सवाल उठ चुके हैं। पिछले वर्षों में NMC ने अदालत को बताया था कि संबंधित डॉक्टरों की कुछ अतिरिक्त योग्यताओं की मान्यता को लेकर स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। वहीं Delhi Medical Council ने भी जांच लंबित रहने तक दो डॉक्टरों को Neonatologist या Super Specialist के रूप में दावा करने से परहेज करने का निर्देश दिया था।
आठ सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट ने NMC सचिव और DGHS को निर्देश दिया है कि वे संयुक्त जांच कर यह स्पष्ट करें कि संबंधित डॉक्टरों की योग्यता भारत में Neonatal Specialist के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए पर्याप्त और मान्य थी या नहीं। जांच रिपोर्ट आठ सप्ताह के भीतर अदालत में दाखिल की जानी है।
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मामले की पृष्ठभूमि
बीते कई वर्षों से यह मामला विभिन्न न्यायिक और नियामक मंचों पर विचाराधीन है। परिवार की ओर से मेडिकल नेग्लिजेंस और डॉक्टरों की योग्यता से जुड़े आरोप लगाए गए हैं, जबकि अस्पताल और संबंधित पक्षों ने समय-समय पर इन आरोपों का विरोध किया है। अदालत की ताजा कार्रवाई का उद्देश्य डॉक्टरों की योग्यता को लेकर लंबे समय से लंबित प्रश्नों पर स्पष्टता प्राप्त करना है।
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