Punjab and Haryana High Court ने एक कथित NEET PG Admission Fraud मामले में ₹14.25 लाख लेने के आरोपी को Anticipatory Bail देने से इनकार कर दिया है। आरोप है कि आरोपी ने अपने बेटे के लिए MD/MS (NEET PG) में Admission दिलाने का भरोसा देकर शिकायतकर्ता से यह रकम ली थी। Court ने मामले को केवल Commercial या Contractual Dispute मानने से इनकार करते हुए कहा कि यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह Postgraduate Medical Admission की regulated प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला गंभीर मामला होगा। Justice Virinder Aggarwal की Single Bench ने कहा कि जांच एजेंसी को Money Trail, कथित Modus Operandi और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच करनी है।
₹14.25 लाख लेने का आरोप
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता की मुलाकात आरोपी और दो अन्य सह-आरोपियों से हुई थी। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि इन लोगों ने खुद को Educational Consultants बताया और भरोसा दिलाया कि वे शिकायतकर्ता के बेटे का किसी प्रतिष्ठित Medical College में MD/MS (NEET PG) Admission करा सकते हैं। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर कई किस्तों में करीब ₹14.25 लाख Admission और Consultancy Charges के नाम पर दिए। आरोप है कि रकम लेने के बावजूद Admission नहीं कराया गया और बाद में Seat Confirm कराने के नाम पर अतिरिक्त पैसे की मांग की गई। शिकायतकर्ता द्वारा रकम वापस मांगने और कानूनी कार्रवाई की बात कहने पर कथित तौर पर उसे धमकाया भी गया। इसी शिकायत के आधार पर 17 अप्रैल 2026 को Faridabad Central Police Station में FIR दर्ज हुई थी।
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Court ने Money Trail पर जताई चिंता
Anticipatory Bail की सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से दलील दी गई कि मामला एक Consultancy Arrangement से जुड़ा था और आरोपी ने Admission Process में सहायता करने की बात कही थी। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी ने जांच में सहयोग किया और Section 35(3) BNSS के तहत जारी Notice के बाद Investigation में शामिल हुआ था। हालांकि, Court ने Consultancy Defence को prima facie पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। Court के सामने रखे गए दस्तावेजों के अनुसार संबंधित Agreement में कुल ₹3 लाख की Consultancy व्यवस्था बताई गई थी, जबकि आरोपों के मुताबिक ₹10 लाख आरोपी के पिता के Bank Account में और ₹2.75 लाख PayTM के जरिए आरोपी के Account में ट्रांसफर किए गए थे। Court ने कहा कि कथित Transaction का तरीका और रकम उस Consultancy Arrangement की सीमा से आगे जाती हुई prima facie दिखाई देती है।
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Custodial Interrogation को बताया जरूरी
High Court ने कहा कि जांच एजेंसी को पूरे Money Trail का पता लगाना है। इसके साथ ही कथित Modus Operandi, रकम के Source और उसके अंतिम Destination की जानकारी जुटाने, कथित Network में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका निर्धारित करने की जरूरत है। Court ने माना कि इन पहलुओं की जांच के लिए इस स्तर पर Custodial Interrogation को अनावश्यक नहीं कहा जा सकता। हालांकि, Court ने स्पष्ट किया कि उसने आरोपों की अंतिम सत्यता या आरोपी की Ultimate Culpability पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए Court ने आरोपी को Anticipatory Bail देने से इनकार करते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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