बीच में दवा छोड़ना खतरनाक: डॉ. अमित कुमार मंडल
गोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. अमित कुमार मंडल ने कहा कि TB Patients को अपना इलाज पूरी तरह से पूरा करना चाहिए और बीच में दवाई छोड़ने की गलती नहीं करनी चाहिए। उन्होंने चेताया कि ऐसा करने से TB के बैक्टीरिया में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (रेजिस्टेंस) विकसित हो जाती है, जिसके बाद मरीज का इलाज करना बेहद मुश्किल हो जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी मरीज के फेफड़े में गांठ पाई जाती है, तो उसकी सही जांच के लिए ब्रोंकोस्कोपी कराना जरूरी है, ताकि सही समय पर सही निदान हो सके।
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लीवर खराब होने पर ट्रांसप्लांट ही समाधान: डॉ. राघव बंसल
डॉ. राघव बंसल ने अपने संबोधन में बताया कि जब किसी मरीज का लीवर पूरी तरह खराब हो जाता है, तो उसका इलाज केवल लीवर ट्रांसप्लांटेशन के जरिए ही संभव है। उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों को आश्वस्त करते हुए कहा कि ट्रांसप्लांट के बाद मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है।
आंकड़ों का हवाला देते हुए डॉ. बंसल ने बताया कि भारत में करीब 4 करोड़ लोग लीवर संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं, और अकेले भारत में हर साल लगभग 20,000 लीवर ट्रांसप्लांटेशन की आवश्यकता पड़ती है, जो इस बीमारी की गंभीरता को दर्शाता है।
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अध्यक्षता और संचालन
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. पूनम मखीजा ने की। सचिव डॉ. नीरज आर्य ने सभी अतिथियों का स्वागत किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन वैज्ञानिक सचिव डॉ. कलीम अहमद ने किया।
इस अवसर पर डॉ. अनुपम मलिक, डॉ. सुधीर अग्रवाल, डॉ. पूनम कुमार, डॉ. सी.एस. चोपड़ा, डॉ. वंदना वर्मा, डॉ. अनिल मलिक, डॉ. सीमा अग्रवाल, डॉ. सुदर्शन नागपाल, डॉ. वी.एस. पुंडीर, डॉ. सौम्या जैन, डॉ. डी.के. गुप्ता, डॉ. महेश चंद्रा, डॉ. रजनीश सिंघल, डॉ. रविकांत, डॉ. प्रवीण मित्तल, डॉ. आर.एस. पंवार, डॉ. सफल कुमार, डॉ. एम.के. जैन, डॉ. सऊद हसन, डॉ. अंशुमन तिवारी, डॉ. खलीलुल्ला खान और डॉ. रजत बंसल सहित शहर के कई प्रतिष्ठित चिकित्सक मौजूद रहे।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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