नई दिल्ली, 24 जुलाई
Resident Doctors के Duty Hours को लेकर दायर Public Interest Litigation (PIL) पर Supreme Court 31 जुलाई को सुनवाई कर सकता है। यह याचिका United Doctors Front (UDF) की ओर से दायर की गई है, जिसमें Uniform Residency Scheme, 1992 को पूरे देश में सख्ती से लागू करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई मेडिकल संस्थानों में Resident Doctors से अत्यधिक घंटे काम कराया जाता है, जिससे उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मरीजों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है। मामले को हाल ही में मौखिक उल्लेख (Oral Mentioning) के बाद 31 जुलाई की संभावित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
क्या है Doctors की मांग?
याचिका में मांग की गई है कि Resident Doctors के लिए अधिकतम 48 घंटे प्रति सप्ताह और 8 घंटे प्रतिदिन की Duty सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा अनिवार्य Weekly Off, पर्याप्त Rest और सुरक्षित Duty Hours लागू करने की भी मांग की गई है। UDF का कहना है कि वर्तमान में कई संस्थानों में Resident Doctors को 70 से 100 घंटे तक साप्ताहिक Duty करनी पड़ती है, जिससे Burnout, तनाव और Clinical Errors का खतरा बढ़ जाता है। संगठन का तर्क है कि यह मुद्दा केवल Doctors के अधिकारों का नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
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1992 Scheme पर फोकस
याचिका में Ministry of Health and Family Welfare की Uniform Residency Scheme, 1992 को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है। इस Scheme में Resident Doctors के Duty Hours को प्रतिदिन 12 घंटे और सप्ताह में 48 घंटे तक सीमित रखने का प्रावधान बताया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि स्पष्ट दिशा-निर्देश होने के बावजूद कई मेडिकल संस्थानों में इनका पालन नहीं किया जा रहा। इसी कारण Supreme Court से पूरे देश में एक समान व्यवस्था लागू कराने और निगरानी तंत्र विकसित करने की मांग की गई है।
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सुनवाई पर टिकी निगाहें
इस मामले पर Supreme Court की सुनवाई Resident Doctors के कार्य-घंटों को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पहले Parliamentary Standing Committee on Health and Family Welfare भी Resident Doctors के अत्यधिक Duty Hours पर चिंता जता चुकी है और Mandatory Rest Period तथा निगरानी वाली Duty Roster Policy लागू करने की सिफारिश कर चुकी है। अब 31 जुलाई की सुनवाई पर मेडिकल समुदाय की नजरें टिकी हैं, क्योंकि अदालत के निर्देश भविष्य में Resident Doctors की कार्य-स्थितियों को प्रभावित कर सकते हैं।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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