नई दिल्ली, 11 जुलाई 2026
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की गुणवत्ता और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं में सुधार के उद्देश्य से Supportive Supervision कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल के तहत सरकारी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में समय-समय पर विशेषज्ञों की टीम पहुंचकर व्यवस्थाओं का मूल्यांकन करेगी, कमियों की पहचान करेगी और सुधार के लिए आवश्यक मार्गदर्शन देगी। पहले चरण में इस कार्यक्रम को राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और झारखंड में लागू किया जाएगा।
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चार राज्यों में शुरू होगी नई निगरानी व्यवस्था
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, Supportive Supervision का उद्देश्य केवल निरीक्षण करना नहीं, बल्कि अस्पतालों को बेहतर सेवाएं देने के लिए तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के पहले चरण में राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और झारखंड के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को शामिल किया गया है। यहां विशेषज्ञ टीम अस्पतालों की कार्यप्रणाली, मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्ध संसाधनों का आकलन करेगी। इसके आधार पर सुधारात्मक सुझाव दिए जाएंगे, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं अधिक प्रभावी और मरीज-केंद्रित बन सकें।
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विशेषज्ञ टीम करेगी मूल्यांकन और देगी सुझाव
इस पहल के तहत विशेषज्ञों की टीम अस्पतालों का दौरा कर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाओं, मरीजों के अनुभव, चिकित्सा उपकरणों के उपयोग और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा करेगी। मूल्यांकन के बाद संबंधित संस्थानों को विस्तृत सुझाव दिए जाएंगे और आवश्यक सुधारों की निगरानी भी की जाएगी। मंत्रालय का मानना है कि केवल कमियां बताने के बजाय संस्थानों को समाधान उपलब्ध कराना इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता होगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में स्थायी सुधार संभव हो सकेगा।
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देशभर में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में अहम कदम
कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि Supportive Supervision भविष्य में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की गुणवत्ता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। यदि पहले चरण में इसके सकारात्मक परिणाम मिलते हैं तो इसे अन्य राज्यों तक भी विस्तारित किया जाएगा। मंत्रालय का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है, ताकि आम नागरिकों का सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर भरोसा और मजबूत हो सके।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं
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