इंदौर, मध्य प्रदेश, 6 जुलाई 2026
MP High Court की इंदौर खंडपीठ में एक Public Interest Litigation (PIL) दायर कर राज्य के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में 1992 की Uniform Residency Scheme को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई Resident Doctors लंबे समय तक लगातार ड्यूटी कर रहे हैं, जबकि निर्धारित Duty Hours और साप्ताहिक अवकाश का पालन नहीं किया जा रहा। याचिकाकर्ता ने अदालत से इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।
Duty Hours और Weekly Off लागू करने की मांग
याचिका में कहा गया है कि सभी मेडिकल कॉलेजों को 1992 की Uniform Residency Scheme के अनुसार Resident Doctors के लिए अधिकतम 12 घंटे प्रतिदिन और 48 घंटे प्रति सप्ताह की ड्यूटी सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके साथ ही किसी भी Resident Doctor से लगातार 12 घंटे से अधिक कार्य न लिया जाए तथा ड्यूटी के बाद न्यूनतम 12 घंटे का विश्राम दिया जाए। याचिका में साप्ताहिक अवकाश की व्यवस्था लागू करने और सभी मेडिकल कॉलेजों में Duty Roster सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की भी मांग की गई है।
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Grievance Redressal System की भी मांग
PIL में यह भी मांग की गई है कि Resident Doctors की शिकायतों के समाधान के लिए प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में Grievance Redressal Mechanism बनाया जाए, जहां Duty Hours के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराई जा सकें। साथ ही शिकायत करने वाले Resident Doctors के खिलाफ किसी प्रकार की प्रताड़ना न हो और Duty Hours के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
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1992 Residency Scheme का हवाला
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि राज्यों और मेडिकल संस्थानों को Uniform Central Residency Scheme लागू करनी थी, जिसमें Resident Doctors के Working Hours, Rest Period और Welfare से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन नियमों का प्रभावी पालन नहीं होने से Resident Doctors पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ रहा है। वहीं, इससे पहले National Medical Commission (NMC) भी सुप्रीम कोर्ट में कह चुका है कि Duty Hours लागू कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और संबंधित मेडिकल संस्थानों की है।
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दीपक अरोड़ा
पत्रकार (BAJMC ,LLB )
सोशल मीडिया एवं डिजिटल पत्रकारिता में 6 वर्षों से सक्रिय हैं, स्वास्थ्य, राजनीति, अपराध और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग एवं विश्लेषणात्मक लेखन का अनुभव रखते हैं। पिछले तीन वर्षों से मेडिकल रिपोर्टर से जुड़े हैं।
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