प्रस्तुति: गगनदीप रल्हन | मेडिकल रिपोर्टर
जयपुर, 28 जून। राजस्थान में प्रसव के बाद सात महिलाओं की संदिग्ध मौत के मामले ने देश की दवा गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की गुणवत्ता संदिग्ध पाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने संबंधित निर्माता कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। मामले की जांच अब राष्ट्रीय स्तर पर की जा रही है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी भारत सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
जांच में क्या मिला?
राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग की प्रयोगशाला जांच में अमृतसर स्थित एम/एस जैक्सन लेबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित ‘टोसिन’ (ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन 5 एमएल) गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। रिपोर्ट के अनुसार, इंजेक्शन में निर्धारित मात्रा के अनुरूप सक्रिय तत्व (ऑक्सीटोसिन) मौजूद नहीं था।
इसके बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने कंपनी के पंजाब और हिमाचल प्रदेश स्थित विनिर्माण संयंत्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द कर दिया गया।
सात मौतों की कड़ी खंगाल रही जांच एजेंसियां
जांच के दायरे में कोटा और बीकानेर के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद दम तोड़ने वाली सात महिलाओं के मामले शामिल हैं। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन मौतों का सीधा संबंध संदिग्ध ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन से था या अन्य चिकित्सकीय कारण भी जिम्मेदार थे।
साथ ही दवा की सप्लाई चेन, विभिन्न बैचों के वितरण रिकॉर्ड और अस्पतालों की खरीद प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित बैच किन-किन राज्यों और स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचा।
क्या है ऑक्सीटोसिन और क्यों है यह इतनी महत्वपूर्ण?
ऑक्सीटोसिन मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे महत्वपूर्ण जीवनरक्षक दवाओं में से एक है। इसका उपयोग प्रसव पीड़ा शुरू कराने, प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (Postpartum Hemorrhage) को नियंत्रित करने और कुछ विशेष चिकित्सकीय परिस्थितियों में गर्भाशय के संकुचन के लिए किया जाता है। यदि इस दवा की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप न हो, तो मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
WHO भी कर रहा है निगरानी
मामले की गंभीरता को देखते हुए WHO ने भारत सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। संगठन यह जानना चाहता है कि क्या संदिग्ध दवा की आपूर्ति अन्य राज्यों तक भी हुई थी और क्या इस तरह की घटनाएं कहीं और भी सामने आई हैं।
📦 फैक्ट बॉक्स: ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन मामला
– संदिग्ध मौतें: 7 प्रसूताएं
– संदिग्ध दवा: टोसिन (ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन 5 एमएल)
– निर्माता कंपनी: एम/एस जैक्सन लेबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, अमृतसर
– जांच में खुलासा: सक्रिय ऑक्सीटोसिन निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिला
– सरकारी कार्रवाई: निर्माता कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द
– जांच एजेंसी: CDSCO, राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग
– अंतरराष्ट्रीय पहलू: WHO ने भारत सरकार से रिपोर्ट मांगी
एक्सपर्ट व्यू
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोग होने वाली जीवनरक्षक दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना केवल नियामक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। इस मामले के निष्कर्ष भविष्य में देश की दवा गुणवत्ता निगरानी प्रणाली और अस्पतालों की खरीद प्रक्रिया में महत्वपूर्ण सुधारों का आधार बन सकते हैं।
लेखक परिचय:
गगनदीप रल्हन (BAJMC) पिछले तीन वर्षों से Medical Reporter से जुड़े हैं। डिजिटल पत्रकारिता में पांच वर्षों के अनुभव के साथ वे स्वास्थ्य, चिकित्सा अनुसंधान, अस्पताल प्रणाली, दवा सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर विशेष रिपोर्टिंग करते हैं।
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