नई दिल्ली ( मेडिकल रिपोर्टर )। दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ऑपरेशंस यूनिट ने नवजात शिशुओं की कथित अवैध खरीद-फरोख्त और फर्जी दस्तावेजों के जरिए गोद दिलाने वाले एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया है। इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक निजी अस्पताल की संचालिका भी शामिल है। पुलिस ने पांच नवजात शिशुओं को सुरक्षित रेस्क्यू किया है।
![]()
डिकॉय ऑपरेशन से खुला मामला
पुलिस के अनुसार 5 जून को आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन क्षेत्र में किए गए एक डिकॉय ऑपरेशन के दौरान तीन लोगों को एक नवजात शिशु के सौदे के आरोप में पकड़ा गया। मौके से एक नवजात शिशु को सुरक्षित बरामद किया गया। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया, जिससे कई राज्यों में फैले नेटवर्क का खुलासा हुआ। ![]()
अस्पताल की भूमिका जांच के दायरे में
जांच में सामने आया कि कुछ नवजात शिशुओं को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में रखा जाता था। आरोप है कि वहां कथित रूप से जन्म और मेडिकल रिकॉर्ड तैयार कर गोद लेने की प्रक्रिया को वैध स्वरूप देने की कोशिश की जाती थी। पुलिस इस पूरे नेटवर्क में स्वास्थ्य संस्थान की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है।
पांच नवजात शिशुओं को बचाया गया
छापेमारी के दौरान हरियाणा, मध्य प्रदेश और अन्य स्थानों से चार और नवजात शिशुओं को बरामद किया गया। सभी पांच बच्चों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया है, जहां उनकी स्वास्थ्य जांच, देखभाल और पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है।
स्वास्थ्य और बाल सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला
विशेषज्ञों का मानना है कि नवजात शिशुओं की अवैध खरीद-फरोख्त केवल कानून व्यवस्था का ही नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, बाल अधिकारों और मेडिकल एथिक्स से जुड़ा गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में नवजातों की पहचान, जन्म रिकॉर्ड, टीकाकरण, स्वास्थ्य निगरानी और भविष्य की देखभाल प्रभावित हो सकती है।
दिल्ली पुलिस अब बच्चों के जैविक माता-पिता की पहचान करने, दस्तावेजों की जांच करने और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। मामले की जांच जारी है।
Discussion about this post