नई दिल्ली, 10 जून 2026
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के 10 वर्ष पूरे होने पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने राष्ट्रव्यापी समारोहों का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले तीन दशकों में Maternal Mortality Ratio (MMR) में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय ने PMSMA को गुणवत्तापूर्ण Antenatal Care सेवाओं के विस्तार और High-Risk Pregnancy की समय पर पहचान सुनिश्चित करने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया।
![]()
मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में दर्ज हुआ उल्लेखनीय सुधार
कार्यक्रम में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार भारत ने वर्ष 1990 के बाद से Maternal Mortality Ratio में लगभग 86 प्रतिशत की कमी दर्ज की है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि यह गिरावट वैश्विक औसत से बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती है। इसके अलावा National Family Health Survey (NFHS) के अनुसार Institutional Deliveries का प्रतिशत 90 से अधिक हो चुका है। Antenatal Care Coverage में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे गर्भावस्था के दौरान संभावित जटिलताओं की पहचान और समय पर उपचार को मजबूती मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित ANC जांच और संस्थागत प्रसव मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
![]()
उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान पर विशेष जोर
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार PMSMA के तहत प्रत्येक माह निर्धारित दिवस पर गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ Antenatal Check-up की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। जनवरी 2022 में शुरू किए गए Extended PMSMA मॉडल और e-PMSMA प्लेटफॉर्म के माध्यम से High-Risk Pregnancies की पहचान, डिजिटल ट्रैकिंग और प्रसव के बाद फॉलो-अप व्यवस्था को मजबूत किया गया है। मंत्रालय का कहना है कि इस प्रणाली ने समय पर रेफरल और जटिल मामलों के बेहतर प्रबंधन में सहायता की है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार High-Risk Pregnancy की शुरुआती पहचान गंभीर प्रसूति जटिलताओं और मातृ मृत्यु के जोखिम को कम करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
7.5 करोड़ से अधिक Antenatal Check-up किए गए
सरकारी आंकड़ों के अनुसार PMSMA के तहत अब तक 7.5 करोड़ से अधिक Antenatal Check-up किए जा चुके हैं। कार्यक्रम के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि लाखों High-Risk Pregnancies की पहचान कर उन्हें आवश्यक चिकित्सा सेवाओं से जोड़ा गया। इस अभियान में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के अलावा हजारों Private Healthcare Specialists भी भागीदारी कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने से दूरदराज और संसाधन-सीमित क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं तक भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार हुआ है।
![]()
सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने में अहम भूमिका
वर्ष 2016 में शुरू किया गया PMSMA भारत सरकार का प्रमुख Maternal Health Programme है, जिसका उद्देश्य सभी गर्भवती महिलाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण Antenatal Care उपलब्ध कराना है। पिछले दस वर्षों में इस कार्यक्रम ने Universal Maternal Health Coverage को मजबूत करने और Safe Motherhood को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल निगरानी, High-Risk Pregnancy Management और Continuum of Care को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य परिणामों में और सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
Discussion about this post