नई दिल्ली, 8 जून 2026
Delhi High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में AIIMS Bhubaneswar को MD (Pharmacology) पाठ्यक्रम में एक डॉक्टर को प्रवेश देने का निर्देश दिया है। डॉक्टर को केवल इसलिए प्रवेश नहीं दिया गया था क्योंकि उसके मूल शैक्षणिक दस्तावेज़ एक अन्य मेडिकल कॉलेज के पास जमा थे। अदालत ने कहा कि किसी मेधावी छात्र को प्रवेश प्रक्रिया की प्रशासनिक और प्रणालीगत कमियों के कारण नुकसान नहीं उठाना चाहिए। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि नियम और प्रक्रियाएं न्याय सुनिश्चित करने के लिए होती हैं, न कि योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय करने के लिए। कोर्ट ने माना कि उम्मीदवार की पात्रता और उसकी नीयत पर कोई सवाल नहीं था, इसलिए केवल दस्तावेज़ों की अनुपलब्धता के आधार पर प्रवेश से वंचित करना उचित नहीं था।
कैसे फंसा पूरा मामला?
याचिकाकर्ता ने MBBS पूरा करने के बाद NEET PG 2025 और INI-CET January 2026 परीक्षा में हिस्सा लिया था। उसे NEET PG काउंसलिंग के दौरान उत्तर प्रदेश के RDMC, बांदा में MD (Physiology) सीट आवंटित हुई थी, जहां प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसने अपने मूल दस्तावेज़ जमा कर दिए। बाद में INI-CET Open Round के परिणाम में उसे AIIMS Bhubaneswar में MD (Pharmacology) सीट मिल गई। हालांकि, AIIMS Bhubaneswar में रिपोर्टिंग के दौरान वह अपने मूल दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं कर सका क्योंकि वे RDMC के पास ही थे। उम्मीदवार ने कॉलेज से दस्तावेज़ वापस लेने और सीट छोड़ने का प्रयास किया, लेकिन उसके अनुसार उस समय ऐसी कोई प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी जिससे वह औपचारिक रूप से सीट से इस्तीफा देकर अपने दस्तावेज़ तुरंत प्राप्त कर सके। इसी कारण उसका प्रवेश रोक दिया गया।
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कोर्ट ने क्यों माना छात्र के साथ अन्याय?
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि उम्मीदवार ने दस्तावेज़ प्राप्त करने के लिए समय रहते प्रयास किए थे और उसकी ओर से किसी प्रकार की लापरवाही नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला उम्मीदवार की गलती का नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की खामियों का परिणाम है। न्यायालय ने माना कि उम्मीदवार ने मेरिट के आधार पर AIIMS Bhubaneswar में सीट हासिल की थी और केवल इसलिए उसे प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि उसके दस्तावेज़ किसी अन्य संस्थान के कब्जे में थे। अदालत ने यह भी कहा कि भौतिक सत्यापन का मुख्य उद्देश्य उम्मीदवार की पहचान और दस्तावेज़ों की वैधता की पुष्टि करना है, जिसे उपलब्ध स्कैन कॉपियों, अंडरटेकिंग और संबंधित संस्थान के पत्र के माध्यम से काफी हद तक पूरा किया जा चुका था। ऐसे में नियमों की कठोर व्याख्या कर उम्मीदवार को बाहर करना न्यायसंगत नहीं होगा।
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AIIMS Bhubaneswar और कॉलेज को क्या निर्देश दिए गए?
Delhi High Court ने अपने आदेश में संबंधित मेडिकल कॉलेज को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर उम्मीदवार के मूल दस्तावेज़ जारी करे। साथ ही AIIMS Bhubaneswar और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि दस्तावेज़ प्राप्त होने पर उनकी जांच की जाए और यदि वे सही पाए जाएं तो उम्मीदवार को MD (Pharmacology) पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया जाए। अदालत ने दोहराया कि किसी मेधावी उम्मीदवार को केवल प्रक्रियात्मक कठोरता के कारण अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता। यह फैसला मेडिकल प्रवेश प्रक्रियाओं में प्रशासनिक लचीलापन और छात्रों के हितों की रक्षा के महत्व को भी रेखांकित करता है।
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