सहारनपुर, 8 जून 2026
सहारनपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में ब्लड की कमी ने मरीजों और उनके परिजनों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। अस्पतालों में उपचार के लिए आने वाले कई मरीजों को समय पर आवश्यक रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे गंभीर मामलों में परेशानी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इस मुद्दे ने जिले में रक्त उपलब्धता और ब्लड बैंक प्रबंधन को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
मरीजों और तीमारदारों पर बढ़ा दबाव
ब्लड की कमी का सबसे अधिक असर उन मरीजों पर पड़ रहा है जिन्हें तत्काल रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। सड़क दुर्घटना के शिकार, थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए नियमित रूप से रक्त की जरूरत पड़ती है। ऐसे में अस्पतालों में सीमित स्टॉक होने से मरीजों के परिजनों को स्वयं रक्तदाताओं की तलाश करनी पड़ रही है। कई मामलों में इलाज की प्रक्रिया भी रक्त उपलब्धता पर निर्भर हो जाती है, जिससे चिंता और बढ़ जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लड बैंक में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना किसी भी बड़े सरकारी अस्पताल के लिए आवश्यक है।
पहले भी सामने आ चुकी हैं ब्लड बैंक व्यवस्था की चुनौतियां
सहारनपुर में हाल के महीनों में ब्लड बैंक व्यवस्था को लेकर कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा जिले के कुछ निजी ब्लड बैंकों में अनियमितताएं मिलने के बाद उनके संचालन पर रोक लगाई गई थी। जांच के दौरान रिकॉर्ड और परीक्षण प्रक्रिया से जुड़ी कमियां सामने आई थीं। इसके बाद बंद किए गए ब्लड बैंकों में मौजूद रक्त को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए थे। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान रक्त उपलब्धता को लेकर लगातार चर्चा बनी रही। बाद में कुछ ब्लड बैंकों से सैकड़ों यूनिट रक्त जिला अस्पताल को उपलब्ध कराया गया था, जिससे अस्थायी राहत मिली थी।
आपातकालीन सेवाओं पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रक्त की उपलब्धता लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो इसका असर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर पड़ सकता है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल जैसे संस्थानों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। गंभीर सर्जरी, प्रसव संबंधी जटिलताओं और दुर्घटना मामलों में रक्त की तत्काल आवश्यकता होती है। ऐसे में पर्याप्त स्टॉक न होने पर मरीजों को अन्य केंद्रों की ओर भेजना पड़ सकता है या उपचार में देरी हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि ब्लड बैंक में विभिन्न रक्त समूहों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध रहे।
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रक्तदान बढ़ाने पर जोर, समाधान की तलाश जारी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि नियमित रक्तदान शिविरों के माध्यम से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अस्पताल प्रशासन भी समय-समय पर लोगों से स्वैच्छिक रक्तदान की अपील करता रहा है। रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने और ब्लड बैंक प्रबंधन को मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि भविष्य में मरीजों को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। फिलहाल, अस्पतालों में रक्त की उपलब्धता को लेकर निगरानी जारी है और जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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